ईरान Vs अमेरिका: अगर युद्ध हुआ तो इस मामले में US को टक्कर देगा तेहरान, पढ़ें फाइटर जेट-ड्रोन और मिसाइल का कंपैरिजन

ईरान से हुए तनाव के बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होरमुज और अरब सागर में अपने एक एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ अदन की खाड़ी की घेराबंदी की है ताकि ईरान को घेरा जा सके. चूंकि अमेरिका और ईरान के बीच कोई जमीनी बॉर्डर नहीं है, ऐसे में माना जा सकता है कि दोनों देशों में अगर कोई जंग होती है तो वो समंदर या फिर आसमान के जरिए, नॉन-कॉन्टैक्ट हो सकती है. ऐसे में दोनों देशों की नौसेना और वायुसेना का आकलन बेहद जरूरी है.

अमेरिका-ईरान में किसकी नौसेना मजबूत?

अमेरिका के पास 20 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं. समंदर में तैरते ये ऐसे विशाल मिलिट्री बेस हैं, जिनपर दर्जनों एफ-18 सुपर होरनेट फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं. इसके अलावा अमेरिका के पास 450 से ज्यादा जंगी जहाज हैं. वहीं ईरान के पास महज 279 जंगी जहाज हैं और कोई भी एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है. अमेरिका के पास 70 तो ईरान के पास 25 सबमरीन हैं. इन पनडुब्बियों के जरिए ईरान की नौसेना, अमेरिका के एयरक्राफ्ट कैरियर और जंगी जहाजों के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में है.

अमेरिका के सामने नहीं टिक पाएगी ईरानी एयरफोर्स

अमेरिकी वायुसेना के पास 13 हजार फाइटर जेट, सर्विलांस एयरक्राफ्ट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, टैंकर (रिफ्यूलिंग) और हेलीकॉप्टर हैं तो ईरान के पास महज 1000 एयरक्राफ्ट हैं. यूएस एयरफोर्स के खेमे में दुनिया के एडवांस्ड और सबसे खतरनाक माने जाने वाले एफ-22 और एफ-35 जैसे स्टील्थ एयरक्राफ्ट हैं. इसके अलावा दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने में जाने वाले सी-17 ग्लोबमास्टर ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट हैं. वहीं ईरानी वायुसेना के पास 80 के दशक के रूसी मिग-29 और 70 के दशक के पुराने एफ-14 फाइटर जेट हैं. दुनिया की अब कोई भी वायुसेना इन एफ-14 का इस्तेमाल नहीं करती है.

अमेरिका पर कैसे भारी पड़ सकता है ईरान?

पिछले साल जून में अमेरिका ने ईरान के जिन परमाणु संयंत्रों पर हमला किया था, उसके लिए इन्हीं एफ-22 और एफ-35 फाइटर जेट का इस्तेमाल किया था, जिन्हें दुनिया की कोई भी रडार या फिर सर्विलांस सिस्टम ट्रैक करना तो दूर डिटेक्ट तक नहीं कर पाई थी. ईरान अगर अमेरिका से किसी मामले में भारी पड़ सकता है तो वो है, मिसाइल और ड्रोन. भले खाड़ी के देशों में अमेरिका के कई मिलिट्री ठिकाने हैं, लेकिन जमीन से मार करने वाली मिसाइलें कम हैं. यही वजह है कि पिछले साल अमेरिका ने ईरान पर अपनी पनडुब्बी से लॉन्च होने मिसाइल से हमला किया था.

ईरान के पास बैलिस्टिक से लेकर हाइपरसोनिक मिसाइल हैं, जिन्हे माना जाता है कि रूस और चीन की मदद से गुपचुप तरीके से तैयार किया गया है. इनमें फतह, जुलफगहार, शबाब, गदर और कोरामशहर शामिल हैं. इन मिसाइलों के जरिए ईरान ने पिछले साल इजरायल के खिलाफ 12 दिन वाले युद्ध का रूख मोड़ दिया था. यहां तक कि ईरान ने कतर में यूएस बेस पर भी हमला कर दिया था.

ड्रोन के जरिए अमेरिका को टक्कर देगा ईरान 

ईरान के पास शहीद ड्रोन है, जिसने यूक्रेन के खिलाफ रूस के लिए जंग का रुख मोड़ दिया है. इन शहीद ड्रोन के जरिए ही ईरान, अमेरिका के एयरक्राफ्ट कैरियर और जंगी जहाज पर हमले की तैयारी में है क्योंकि यही ड्रोन, यमन के हूती विद्रोहियों ने अमेरिका के जंगी जहाज और एमक्यू-9 प्रीडेटर ड्रोन के खिलाफ इस्तेमाल कर नाक में दम कर दिया था.

युद्ध की आहट के साथ, रूस की नौसेना आज ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट पहुंच गई है ताकि अमेरिका को युद्ध से रोका जा सके. वहीं ईरान पर हमला करने के लिए इंग्लैंड ने अमेरिका को अपने मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने से रोक लगा दी है. पिछले साल, अमेरिका ने हिंद महासागर में इग्लैंड के डिएगो गार्सिया बेस से ईरान पर हमला किया था. साफ है कि अगर जंग हुई तो अमेरिका को इजरायल के अलावा कम देश समर्थन में आएंगे, जबकि ईरान के लिए रूस तो पहले से खड़ा है और चीन भी अपरोक्ष रूप से मदद कर सकता है.

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