Stock Market Crash: सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम! ईरान-अमेरिका तनाव से सहमा बाजार, क्या लंबी चलेगी गिरावट? – stock market crash sensex nifty plunge amid iran us tensions is the downtrend here to stay

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में आज 19 फरवरी को भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 750 अंकों तक लुढ़क गया। वहीं निफ्टी गिरकर 25,650 के नीचे चला गया। इसके साथ ही दोनों इंडेक्सों ने अपने अहम सपोर्ट लेवल को भी तोड़ दिया है। लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है कि क्या यह गिरावट केवल मुनाफावसूली है या फिर ट्रेंड में बदलाव का संकेत।

दोपहर में बढ़ी गिरावट

शेयर बाजार दोपहर के कारोबार के दौरान बिकवाली तेज हुई। आईटी, बैंकिंग और ऑटो जैसे बड़े सेक्टरों में दबाव देखने को मिला। ग्लोबल स्तर पर भी संकेत कमजोर रहे। खासतौर पर अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेतों ने बाजार में घबराहट बढ़ाई।

ईरान पर तनाव से बढ़ी चिंता

मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक शेयर बाजार में आज की गिरावट के पीछे भू-राजनीतिक तनाव बड़ा कारण है। अमेरिका की ओर से ईरान पर संभावित कार्रवाई की खबरों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

मिडिल ईस्ट, पूरी दुनिया के लिए क्रूड ऑयल सप्लाई का बड़ा केंद्र है। खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज कच्चे तेल के निर्यात का अहम मार्ग है। अगर वहां किसी तरह का व्यवधान आता है तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे ग्लोबल स्तर पर महंगाई पर दबाव बढ़ेगा और शेयर बाजारों पर नेगेटिव असर पड़ेगा।

मुनाफावसूली या ट्रेंड रिवर्सल?

PlusCash के फाउंडर और सीईओ प्रणव कूमार का कहना है कि तीन दिन की लगातार तेजी के बाद आज आई तेज गिरावट को फिलहाल शॉर्ट टर्म प्रॉफिट बुकिंग माना जा सकता है। उनके मुताबिक बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है। निवेशक अक्सर तेजी के बाद मुनाफा निकालते हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर गिरावट ज्यादा बड़ी हो और बड़े शेयर भी टूटने लगें, तो यह संकेत हो सकता है कि निवेशक अपने रिस्क प्रोफाइल पर दोबारा विचार कर रहे हैं।

वहीं Badjate Stock & Shares Pvt Ltd के डायरेक्टर तुषार बडजाते का मानना है कि यह गिरावट लंबी अवधि के ट्रेंड में बदलाव का संकेत नहीं है। उनके अनुसार जब बाजार तेजी से ऊपर जाता है, तो पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग और मुनाफावसूली स्वाभाविक है। ऐसी गिरावट बाजार को ठंडा करती है और अगली तेजी के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।

बडजाते के मुताबिक, शेयर बाजार अक्सर बड़ी खबरों पर तेज प्रतिक्रिया देता है, लेकिन हालात साफ होने के बाद स्थिति संभल जाती है। जब तक तनाव लंबा खिंचकर ऐसे बड़े टकराव में नहीं बदलता, जिससे क्रूड की सप्लाई या ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़े, तब तक बाजार की फंडामेंटल स्थिति मजबूत बनी हुई है। कॉरपोरेट अर्निंग्स, इकोनॉमी की मजबूती और पर्याप्त लिक्विडिटी बाजार को मध्यम और लंबी अवधि में सहारा दे रही है।

वहीं प्रणव कूमार के मुताबिक शार्ट-टर्म में बाजार सीमित दायरे में रह सकता है और उतार-चढ़ाव ज्यादा रहेगा। लेकिन ट्रेंड रिवर्सल के लिए जरूरी है कि अहम तकनीकी स्तर टूटें और मैक्रो फंडामेंटल कमजोर पड़े।

इन स्तरों पर रखें नजर

बोनांजा के टेक्निकल एनालिस्ट ड्रमिल विथलानी के मुताबिक, लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद बाजार में कुछ मुनाफावसूली दिख रही है। हालांकि, इससे अभी ट्रेंड बदलने का साफ संकेत नहीं मिलता। उनका कहना है कि निफ्टी अभी भी 25,150–25,200 के अहम सपोर्ट जोन के ऊपर बना हुआ है, जो आगे के लिए महत्वपूर्ण स्तर है।

RSI जैसे मोमेंटम इंडिकेटर ओवरसोल्ड स्तर से ऊपर आकर अब सामान्य स्तर के आसपास हैं। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में फिलहाल कमजोरी नहीं, बल्कि कंसोलिडेशन है।

जब तक निफ्टी 25,150 के ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार में रिकवरी जारी रह सकती है और यह 26,000–26,200 के स्तर तक दोबारा जा सकता है। लेकिन अगर यह सपोर्ट टूटता है, तो बाजार में फिर से बिकवाली बढ़ सकती है और निफ्टी 24,800 तक गिर सकता है।

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