How To Know If You Have Magnesium Deficiency: मैग्नीशियम एक जरूरी मिनरल है जो मांसपेशियों की कार्यप्रणाली, नसों के सिग्नल, दिल की धड़कन और त्वचा की सेहत को संतुलित रखने में मदद करता है. जब शरीर में इसकी कमी होने लगती है, तो कुछ हल्के संकेत चेहरे और आंखों के आसपास दिखाई दे सकते हैं.
हालांकि यह समझना जरूरी है कि सिर्फ चेहरे में बदलाव दिखना हमेशा मैग्नीशियम की कमी का प्रमाण नहीं होता. नींद की कमी, तनाव, एलर्जी या दिनचर्या में बदलाव भी इसके पीछे हो सकते हैं. लेकिन जब लाइफस्टाइल सुधारने के बाद भी समस्या बनी रहे, तो आपको सावधान होने की जरूरत है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉ. मोहित शर्मा ने TOI को बताया कि मैग्नीशियम की कमी अक्सर जोरदार लक्षण नहीं देती. यह चुपचाप नसों और मांसपेशियों के संतुलन, नींद, ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म और सेल्स की मरम्मत में भूमिका निभाता है. कमी होने पर शरीर पहले खुद को एडजस्ट करने की कोशिश करता है, इसलिए शुरुआती संकेत हल्के हो सकते हैं. चलिए आपको इसके कुछ लक्षण बताते हैं.
आंख की पलक फड़कना
आंख की पलक फड़कना एक आम शिकायत है. अक्सर यह थकान, ज्यादा स्क्रीन टाइम, कैफीन या तनाव से जुड़ा होता है. लेकिन मैग्नीशियम नसों और मांसपेशियों के बीच संतुलन बनाए रखता है. इसकी कमी से न्यूरोमस्कुलर उत्तेजना बढ़ सकती है, जिससे पलक बार-बार फड़कने लगती है. अगर यह लंबे समय तक या दोनों आंखों में हो, तो जांच जरूरी हो सकती है.
डार्क सर्कल और सूजन
डार्क सर्कल और आंखों के नीचे सूजन भी कई कारणों से हो सकते हैं. नींद की कमी, एलर्जी या आयरन की कमी आम वजहें हैं. मगर मैग्नीशियम नींद को बेहतर बनाने और सूजन नियंत्रित करने में मदद करता है. इसकी कमी से चेहरा थका हुआ, फीका या सूजा हुआ दिख सकता है. कुछ लोगों में स्किन ड्राय या संवेदनशील भी हो जाती है, क्योंकि यह स्किन बैरियर और सेल रिपेयर में सहायक होता है.
ये भी होते हैं साइन
जबड़े में जकड़न, चेहरे में तनाव, हल्का कंपन या बार-बार सिरदर्द भी संकेत हो सकते हैं. मैग्नीशियम प्राकृतिक मसल रिलैक्सेंट है, इसलिए कमी होने पर मांसपेशियां अधिक सक्रिय हो सकती हैं. माइग्रेन और रोशनी के प्रति संवेदनशीलता भी कुछ मामलों में इससे जुड़ी पाई गई है.
क्या करना चाहिए आपको?
डॉक्टरों के अनुसार, मैग्नीशियम की जांच आसान नहीं है. सामान्य सीरम टेस्ट हमेशा सही तस्वीर नहीं दिखाता. इसलिए लक्षण, डाइट और जोखिम कारकों को साथ में देखकर ही निर्णय लिया जाता है. हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स, बीज, साबुत अनाज और दालें इसके अच्छे सोर्स हैं. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लिया जा सकता है. यदि बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन, थकान, नींद की समस्या या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग हो, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए. सही समय पर ध्यान देने से छोटी कमी बड़ी समस्या बनने से रोकी जा सकती है.
इसे भी पढ़ें- Beer And Cough In Winter: क्या सर्दियों में बियर पीने से हो जाती है खांसी, डॉक्टर से जानें यह कितनी नुकसानदायक?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
Read More at www.abplive.com