IT Stocks: लगातार चौथे कारोबारी दिन आईटी सेक्टर में हाहाकार, कब तक AI के चलते रहेगा डर! – infosys techm wipro other it stocks decline up to 2 percent extend losses to 4th day amid ai worries what lies ahead

IT Stocks: एआई के चलते आईटी सेक्टर में जो हाहाकार मचा हुआ, वह आज लगातार चौथे कारोबारी दिन भी जारी रहा। आईटी स्टॉक्स की पिटाई के चलते दिग्गज कंपनियों के निफ्टी इंडेक्स Nifty IT में करीब 1% की गिरावट आई और यह शुरुआती कारोबार में 32,300 के नीचे आ गया था। इस गिरावट के साथ लगातार चार कारोबारी दिनों में यह 9% से अधिक फिसल चुका है। पिछले साल 2025 में करीब 13% टूटने के बाद इस साल 2026 में अब तक यह करीब 15% फिसल चुका है। हैवीवेट इंफोसिस (Infosys) का शेयर आज 2% से अधिक फिसल गया। पांच कारोबारी दिनों में यह 10% से अधिक तो एक महीने में 20% से अधिक टूटा है।

टेक महिंद्रा के शेयर आज 1% से अधिक कमजोर हुए हैं तो विप्रो और एलटीआईमाइंडट्री के शेयर भी 1-1% फिसले हैं। टीसीएस, एचसीएलटेक और एमफेसिस के शेयर भी लाल हैं तो दूसरी तरफ कोफोर्ज और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयरों ने रिकवरी कर ली और ग्रीन हैं।

क्यों गिर रहे IT Stocks?

इस महीने की शुरुआत में एंथ्रॉपिक (Anthropic) ने ऐसा एआई टूल लॉन्च किया जिससे कॉम्पटीशन तेज होने की चिंता बढ़ गई। निवेशकों को डर है कि ए़डवांस्ड AI प्लेटफॉर्म सॉफ्टवेयर सर्विसेज के ट्रेडिशनल रेवेन्यू मॉडल को झटका दे सकतेहैं। एंजेल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकार जावेद खान का कहना है कि वैश्विक टेक सेक्टर की कमजोरी और रुपये की गिरावट ने सेंटिमेंट कमजोर किया, जिससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली बढ़ी।

एक और वजह से सेंटिमेंट कमजोर हुआ, अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट से। हालांकि जनवरी में अमेरिकी में रोजगार में बढ़ोतरी उम्मीद से बेहतर रही और बेरोजगारी दर घटकर 4.3% पर आ गई और इससे संकेत मिलता है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को कुछ समय तक स्थिर रख सकता है लेकिन रोजगार में बढ़ोतरी मुख्य रूप से हेल्थ सेक्टर में रही। रिपोर्ट के अनुसार हेल्थ और सोशल असिस्टेंस के अलावा अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कमजोर रहे। FWDBONDS के मुख्य अर्थशास्त्री क्रिस्टोफर रुपकी के मुताबिक कि अगर आप नौकरी ढूंढ रहे हैं, तो अधिक मौके नहीं हैं।

अब आगे क्या?

MULTYFI के सीओओ दर्शन राठौड़ का कहना है कि निवेशकों को डर है कि एआई अब इंजीनियर्स की जगह ले लेंगे, खासतौर से आईटी सर्विसेज सेक्टर में लेकिन यह डर तार्किकता की बजाय भावनात्मक ही अधिक है। उन्होंने कहा कि एआई टूल्स कोड लिख सकता है, बग फिक्स कर सकता है और पहले की तुलना में अधिक तेजी से सिस्टम चालू कर सकता है तो ऐसे में निवेशकों को डर है कि कहीं कंपनियों को इंजीनियर्स की जरूरत कम न पड़ने लगे। जब एंप्लॉयीज की संख्या कम होती है तो कॉस्ट स्ट्रक्चर बदलता है और इसका असर स्टॉक वैल्यूएशन पर भी दिखता है।

हालांकि उनका मानना है कि एआई बहुत शक्तिशाली है लेकिन मुख्य रूप से एक प्रोडक्टिविटी टूल के ही रूप में। इससे इंजीनियर्स को काम तेज और अच्छे से करने में मदद मिलेगी क्योंकि एक ही चीज का दोहराव कम होगा। इससे आईटी कंपनियों का मार्जिन सुधरेगा लेकिन एआई जिम्मेदारी नहीं ले सकता जबकि बड़ी वैश्विक कंपनियां जटिल और कस्टमाइज्ड सिस्टम पर काम करती हैं, जिनमें मानवीय फैसले और जवाबदेही जरूरी है। उनके अनुसार यह आईटी सर्विसेज का अंत नहीं बल्कि एक बदलाव का दौर है। अगर एआई सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट को सस्ता और तेज बनाता है, तो डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की मांग और बढ़ सकती है, जिससे आईटी कंपनियों के लिए अवसर बढ़ सकते हैं।

PlusCash के संस्थापक और CEO प्रणव कुमार ने भी कहा कि आईटी स्टॉक्स की गिरावट अधिकतर सेंटिमेंट आधारित है, न कि बुनियादी कमजोरी के कारण। उन्होंने कहा कि नए दौर के इनोवेटिव एप्लीकेशंस का एआई को लेकर ट्रेडिशनल अप्रोच बदलेगा लेकिन भारतीय आईटी कंपनियों के पास अच्छे सौदे हैं और वैश्विक ग्राहकों के साथ उनके मजबूत संबंध हैं। प्रणव कुमार का कहना है कि शॉर्ट टर्म में शेयरों में कुछ और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है लेकिन जिन कंपनियों ने एआई इंटीग्रेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सर्विसेज को लेकर स्पष्टता दिखाई है, उनके वापसी करने और विकास के अगले चरण को स्पीड देने की अधिक संभावना है।

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