
पुलवामा हमले की बरसी पर पढ़िए शहीद पंकज त्रिपाठी की कहानी उनके भाई की जुबानी।
Pulwama Attack 7th Anniversary: 14 फरवरी की तारीख यूपी के महाराजगंज की त्रिपाठी फैमिली के लिए वो ‘काला दिन’ है, जिसने उनकी हंसती-खेलती जिंदगी को उजाड़ दिया। पुलवामा हमले की आज 7वीं बरसी है। आज ही के दिन 7 साल पहले उस कायराना आत्मघाती हमले में भारत ने अपने 40 शूरवीरों को खो दिया था, जिनमें महाराजगंज के लाल कॉन्स्टेबल पंकज त्रिपाठी भी थे। तिरंगे झंडे में लिपटकर जब वे अपने घर आए, तो अपने पीछे 3 महीने की अजन्मी बेटी, 3 साल का बेटा, पत्नी और बूढ़े मां-बाप को छोड़ गए। मां, बेटे के दुनिया से जाने का गम नहीं सहन कर पाईं और 1 साल बाद ही प्राण त्याग दिए। पंकज त्रिपाठी की शहादत के 7 साल बाद उनका परिवार किस हाल में है? उनकी बेटी को शहीद पिता पंकज की याद कैसे आती है? इसे जानने के लिए INDIA TV ने शहीद पंकज त्रिपाठी के छोटे भाई शुभम त्रिपाठी से एक्सक्लूसिव बातचीत की, जिन्होंने नम आंखों से भाई की उस ‘आखिरी विदाई’ और उनके परिवार के संघर्ष की दास्तां बयां की।
सवाल- आपके बड़े भाई शहीद पंकज त्रिपाठी के साथ बिताए बचपन के कौन से पल आपको सबसे ज्यादा याद आते हैं और जब उन्होंने CRPF ज्वाइन करने का फैसला किया, तो घर में कैसा माहौल था?
जवाब- शुभम त्रिपाठी ने कहा, ‘घर में सबको गर्व महसूस हो रहा था क्योंकि उनका बचपन से ही सेना में जाने का सपना था। हमारे बड़े पिता जी भी फौज में थे और रिटायर होकर आए थे। उन्हें देखकर और वर्दी को देखकर भैया का सपना फौज में जाने का ही बन गया था। एक भाई के साथ बिताया हुआ हर पल हमेशा के लिए खास होता है। मुझे उनकी सबसे अच्छी बात जो लगती थी, वह यह थी कि वे परिवार के सबसे जिम्मेदार व्यक्ति थे।’
सवाल- शहीद पंकज त्रिपाठी जब छुट्टियों पर घर आते थे, तो उनका सबसे पसंदीदा काम क्या होता था?
जवाब- शुभम त्रिपाठी ने बताया कि जब शहीद पंकज त्रिपाठी छुट्टी आते थे, तो अगर खेती का समय होता था, तो सबसे पहले खेत देखने जाते थे। छुट्टी चाहे 10 दिन की हो या एक महीने की, वो कोशिश करते थे कि सबसे मिलें-जुलें। अपने लोगों से मुलाकात करें।
सवाल- आखिरी बार जब शहीद पंकज त्रिपाठी छुट्टी के बाद वापस ड्यूटी पर जा रहे थे, तो विदा लेते वक्त उन्होंने आपसे क्या कहा था? आप दोनों की क्या बातचीत हुई थी?
जवाब- शुभम त्रिपाठी के मुताबिक, उनके बड़े भाई शहीद पंकज त्रिपाठी ने बस यही कहा था, ‘मैं तो जा रहा हूं, तुम परिवार का ध्यान रखना, अब जिम्मेदारी तुम्हारी है। पिता जी का, अम्मा का, सबका ध्यान रखना।’
सवाल- 14 फरवरी 2019 को जब यह दुखद खबर मिली, तब आप कहां थे और आपका पहला रिएक्शन क्या था?
जवाब- शुभम त्रिपाठी ने कहा, ‘उस समय मैं गोरखपुर में अपने हॉस्टल में था। भैया 4-5 दिन पहले ही घर से गए थे। दरअसल, उनकी छुट्टी खत्म हो रही थी, लेकिन हमारे दादा जी का निधन हो गया था, इसलिए उनके अंतिम संस्कार के लिए उन्होंने अपनी छुट्टी बढ़वा ली थी और फिर वे गए थे। जिस दिन भैया शहीद हुए, उस रात बहुत तेज आंधी-तूफान था, जिसे हम कभी नहीं भूल सकते।’
सवाल- आपके बड़े भाई पंकज त्रिपाठी के शहीद होने के बाद परिवार पर, खास तौर पर माता-पिता पर क्या असर पड़ा?
जवाब- शुभम त्रिपाठी ने बताया कि भैया के न रहने पर परिवार की सारी जिम्मेदारियां मेरे ऊपर आ गईं। पिता जी हार्ट के मरीज हैं। भैया के जाने के लगभग एक साल बाद ही माता जी को ब्रेन हैमरेज हुआ और उनका भी देहांत हो गया। भैया के जाने के बाद से ही वह बीमार रहने लगी थीं। तब मेरी पढ़ाई चल रही थी, लेकिन जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई छूट गई और मैंने काम शुरू कर दिया। अभी मैं कंस्ट्रक्शन का काम करता हूं।
सवाल- क्या सरकार की तरफ से परिवार को मदद और सुविधाएं मिलीं? क्या उनके नाम पर कोई स्मारक या सड़क का नाम रखा गया है?
जवाब- शुभम त्रिपाठी ने कहा, ‘जी हां, सरकार की तरफ से जो मिलना था, मिला। गांव में जमीन और कुछ धनराशि मिली। भाभी को ग्राम विकास विभाग में क्लर्क की नौकरी मिल गई है। साथ ही, गांव का प्राथमिक विद्यालय उनके नाम पर कर दिया गया है। सुनौली बॉर्डर के लिए जाने वाले NH-24 हाईवे पर उनके नाम का तोरण द्वार बना है। गांव में एक स्मारक स्थल, खेल का मैदान और अमृत सरोवर भी उन्हीं के नाम पर बनाया गया है।’
सवाल- 14 फरवरी को शहीद पंकज त्रिपाठी की बरसी पर क्या कार्यक्रम होता है?
जवाब- शुभम त्रिपाठी के मुताबिक, 14 फरवरी को स्मारक पर माल्यार्पण होता है और फ्री स्वास्थ्य कैंप का आयोजन किया जाता है। जिले के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और सम्मानित जनता वहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
सवाल- शहीद पंकज त्रिपाठी के बच्चों के बारे में बताएं, वो अब कितने बड़े हैं?
जवाब- शुभम त्रिपाठी ने बताया, ‘उनके बड़े भाई शहीद पंकज त्रिपाठी के दो बच्चे हैं- एक बेटा और एक बेटी। बेटा लगभग 10 साल का है। जब भैया शहीद हुए थे, तब बेटी 3 महीने की गर्भ में थी, अब उसका सातवां साल चल रहा है। बच्चों का भी सपना फौज में जाने का है। अभी तो वे छोटे हैं, अक्सर पूछते हैं कि पापा कहां हैं, तो हम यही बताते हैं कि वो ड्यूटी पर हैं।
सवाल- पुलवामा हमले की बरसी पर आप देश के लोगों और सरकार से क्या कहना चाहेंगे?
जवाब- शुभम त्रिपाठी बोले, ‘मैं यही कहना चाहूंगा कि सभी लोगों को देश और हमारे जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करना चाहिए। जवानों का हौसला बढ़ाना चाहिए क्योंकि वो अपना परिवार छोड़कर हम सबकी सुरक्षा के लिए वहां तैनात रहते हैं। उनके परिवार की जिम्मेदारी हम सबकी होती है।’
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