Stock Market : SBI के बाद अब ICICI बैंक ने भी TCS के मार्केट कैप को छोड़ पीछे, AI के डर के चलते IT शेयरों में बिकवाली बढ़ी – stock market news after sbi icici bank has now surpassed tcs market cap with ai fears fueling selling in it stocks

Stock Market news : ICICI बैंक 12 फरवरी को मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के मामले में TCS को पीछे छोड़कर पांचवीं सबसे बड़ी भारतीय कंपनी बन गई। यह SBI के IT कंपनी TCS को पछाड़कर चौथा स्थान लेने के एक दिन बाद हुआ है। AI से जुड़ी नई चिंता की वजह से टेक शेयरों में बड़े पैमाने पर बिकवाली आई है। इसके चलते TCS के मार्केट कैप में कमी आई है।

12 फरवरी को ICICI बैंक के शेयर में करीब 2 परसेंट की बढ़त देखने को मिली है। इसके चलते इसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब 10.22 लाख करोड़ रुपए हो गया है। वहीं,TCS के शेयर में करीब 5 परसेंट की गिरावट आई है। इससे इसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन गिरकर 10.04 लाख करोड़ रुपए पर आ गया है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) 19.8 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैपिटलाइजेशन के साथ भारत की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बनी हुई है, इसके बाद HDFC बैंक और भारती एयरटेल का नंबर आता है।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) आज टॉप IT लूजर्स में से एक है। इसमें वॉल स्ट्रीट की दूसरी कंपनियों की तरह ही गिरावट आई है। अमेरिका की जनवरी जॉब्स रिपोर्ट उम्मीद से बेहतर रही है। लेकिन AI से जुड़ी चिंताओं के बीच आईटी को लेकर इन्वेस्टर्स का सेंटिमेंट खराब हुआ है।

जनवरी में US में जॉब ग्रोथ अचानक बढ़ी है और अनएम्प्लॉयमेंट रेट गिरकर 4.3 फीसदी हो गई है। लेबर मार्केट में स्थिरता के ये संकेत फेडरल रिजर्व को कुछ समय के लिए इंटरेस्ट रेट्स को बिना बदले यथास्थिति बनाए रखने की गुंजाइश दे सकते हैं, जबकि पॉलिसी बनाने वाले महंगाई पर नज़र रखेंगे।

अमेरिकी जॉब रिपोर्ट से पता चलता है कि हेल्थ सेक्टर में पेरोल में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। जॉब ग्रोथ मुख्य रूप से हेल्थकेयर और सोशल सर्विस इंडस्ट्री में ही रही है। रोज़गार में बढ़ोतरी में इन सेक्टरों का ही सबसे बड़ा योगदान है।

वेंचुरा सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर का कहना है कि IT स्टॉक्स में आज की गिरावट “बिना सोचे-समझे रिएक्शन और IT के लिए असली खतरे की चिंताओं का मिलाजुला असर है।” बोलिंजकर ने आगे कहा,”AI ऑटोमेशन टॉप इंडियन IT फर्मों में लेबर-हैवी मॉडल्स को टारगेट करता है,जिससे बिलेबल घंटे और हेडकाउंट कम हो जाते हैं।” उनका यह भी मानना है कि आगे इस सेक्टर में और गिरावट आ सकती है।

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