Goldman Sachs India Plan: होटल ताज की उस मीटिंग के बाद इंडिया को लेकर गोल्डमैन सैक्स की सोच बदल गई – goldman sachs india plan after meeting at hotel taj mahal goldman sachs changes its india plan india growth story

Goldman Sachs India Plan: दिल्ली के ताजमहल होटल में गोल्डमैन सैक्स ग्रुप की ग्लोबल बोर्ड मीटिंग चल रही थी। दुनिया के इस दिग्गज फाइनेंशियल ग्रुप के डायरेक्टर्स बोर्ड मीटिंग में मौजूद थे। कंट्री हेड संजय चटर्जी ने मीटिंग में ऐसी बातें कहीं, जिसकी उम्मीद शायद ही किसी डायरेक्टर ने की होगी। उन्होंने नए भारत के बारे में अपनी राय मीटिंग में बताई। इस मीटिंग में सीईओ डेविड सोलोमन भी मौजूद थे।

चटर्जी ने कहा कहा कि अब इंडिया के बारे में सिर्फ फ्यूचर ग्रोथ स्टोरी की धारणा हमें बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि इंडिया में इनफ्लेशन काबू में आ चुका है। बैंकों के बैड लोन में बड़ी कमी आई है। कंपनियों की बैलेंसशीट बीते कई दशकों में सबसे स्ट्रॉन्ग है। कुछ डायरेक्टर्स ने चटर्जी की राय पर अपनी प्रतिक्रिया जताई। लेकिन, कुछ ही देर बाद सबको चर्टजी की बातों में दम लगा। इसका नतीजा यह हुआ कि गोल्डमैन ने इंडिया में अपनी बैंकिंग फ्रैंचाइजी में बीते तीन सालों में करीब 50 करोड़ डॉलर निवेश किया।

गोल्डमैन सैक्स का इंडिया पर यह दांव रंग दिखा रहा है। भारत में पिछले साल कंपनियों के इक्विटी इश्यू के मैनेजमेंट में गोल्डमैन सैक्स चौथे पायदान पर रहा। विलय और अधिग्रहण (M&A) की डील में बतौर एडवाइजर यह पांचवें पायदान पर रहा। यह जानकारी ब्लूमबर्ग के डेटा पर आधारित है। बीते एक दशक में पहली बार गोल्डमैन सैक्स शेयरों की बिक्री के मामले में अपनी प्रतिद्वंद्वी मॉर्गन स्टेनली से आगे निकल गया।

गोल्डमैन सैक्स को इंडिया में बड़ी संभावनाएं दिख रही हैं। बैंक का मानना है कि इंडिया में आईपीओ मार्केट की ग्रोथ तेज बनी रहेगी। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, गोल्डमैन सैक्स के हाथ में पहले से कम से कम 10 कंपनियों के आईपीओ हैं। करीब 138 कंपनियों को आईपीओ पेश करने के लिए सेबी की मंजूरी मिल चुकी है। 68 कंपनियां आईपीओ का अप्लिकेशन मंजूर होने का इंतजार कर रही हैं। पिछले साल भारतीय कंपनियों ने आईपीओ से रिकॉर्ड 22 अरब डॉलर जुटाए थे। इससे इंडिया दुनिया में आईपीओ के लिहाज से सबसे व्यस्त बाजारों में शामिल हो गया।

गोल्डमैन सैक्स ने मुंबई में अब एक बड़ा ऑफिस ले लिया है। बेंगलुरु में पहले से बैंक का बड़ा ऑफिस मौजूद है, जिसमें बीते दो दशकों से हजारों एंप्लॉयीज काम कर रहे हैं। बैंक ने इंडिया में अब इक्विटी अंडरराइटिंग, मर्जर्स, प्राइवेट क्रेडिट और स्ट्रक्चर्ड फाइनेंस पर फोकस करने का प्लान बनाया है। चटर्जी ने एक इंटरव्यू में कहा, “आप सिर्फ फीस आधारित इनवेस्टमेंट-बैंकिंग माइंडसेट के साथ इंडिया में बिजनेस नहीं कर सकते।” इसका मतलब साफ है। गोल्डमैन सैक्स को इंडिया में बड़ी संभावनाएं दिख रही हैं।

गोल्डमैन सैक्स अब उन बड़े विदेशी बैंकों में शामिल हो चुका है, जो इंडिया की ग्रोथ को लेकर आश्वस्त हैं। अभी एशियाई देशों में गोल्डमैने के रेवेन्यू के लिहाज से इंडिया चीन और जापान के मुकाबले पीछे है। लेकिन, बैंक के कारोबार की सबसे ज्यादा ग्रोथ इंडिया में है। जेपी मॉर्गन, सिटीग्रुप और बैंक ऑफ अमेरिका कॉर्प की तरह इंडिया में गोल्डमैन सैक्स के पास कमर्शियल बैंकिंग का लाइसेंस नहीं है। इससे बड़ी डील हासिल करने के लिए बैंक को अपनी बैलेंसशीट के इस्तेमाल में दिक्कत आती है।

आज बैंक के टेक्नोलॉजी सेंटर में करीब 8,000 लोग काम कर रहे हैं। दो दशक पहले जब इसने बतौर बैक-ऑफिस इस सेंटर को शुरू किया था, तब इसमें 300 लोग काम करते थे। अमेरिका के बाहर गोल्डमैन के सबसे ज्यादा एंप्लॉयीज इंडिया में हैं। बैंक ने इंडिया में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए लीडरशिप में बदलाव किया है। संजय चटर्जी की भूमिका बढ़ाई गई है। पिछले साल गोल्डमैन सैक्स ने छह मैनेजिंग डायरेक्टर्स को प्रमोट किया था। बैंक ने भारत में फॉरेन एक्सचेंज ट्रेडिंग का विस्तार करने का भी प्लान बनाया है। यह इंडिया में सबसे एक्टिव प्राइवेट-क्रेडिट प्लेयर्स में शामिल हो चुका है।

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