उत्तराखंड के एक जिम मालिक दीपक कुमार को एक मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़ा होना भारी पड़ गया. दीपक कुमार ने 70 साल के बुजुर्ग को बजरंग दल के सदस्यों के निशाने से बचाया था. अब दीपक कुमार आर्थिक बहिष्कार का सामना कर रहे हैं.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, दीपक कुमार कोटद्वार में बद्रीनाथ रोड पर ‘हल्क जिम’ चलाते थे, जिसके 150 मेंबर थे. लेकिन विवाद होने के बाद से अब यह संख्या घटकर केवल 15 रह गई है. दीपक जिम के फ्लोर के लिए 40,000 रुपये महीने का किराया देते हैं. इसके अलावा होम लोन की किस्त के 16,000 रुपये देते हैं. अभी, परिवार का खर्च उनकी 70 साल की मां की चाय की दुकान से चल रहा है. अब स्थानीय लोग अपने बच्चों और परिवार वालों को उनके जिम भेजने से डर रहे हैं.
बता दें, 26 जनवरी को एक भीड़ बुजुर्ग वकील अहमद की दुकान पर पहुंची. भीड़ ने दुकान के नाम ‘बाबा स्कूल ड्रेस’ पर एतराज जताया. भीड़ में शामिल लोगों ने बुजुर्ग से कहा कि वे दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटा लें. उनका कहना था कि यह स्थानीय सिद्धबली बाबा मंदिर के साथ कंफ्यूज कर सकता है. हालांकि, वहां कई अन्य दुकानों पर बिना किसी समस्या के ‘बाबा’ शब्द का यूज किया जा रहा है. भीड़ पर यह भी आरोप लगाया गया है कि अहमद को केवल उनकी धार्मिक पहचान की वजह से निशाना बनाया गया था.
जब भीड़ बुजुर्ग दुकानदार से नाम बदलने को कह रही थी, तभी जिम मालिक दीपक ने दुकानदार का पक्ष लेते हुए दखल दिया. इस पर भीड़ में शामिल लोगों ने उनसे नाम पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि ‘मेरा नाम मोहम्मद दीपक है.’
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. सोशल मीडिया पर दीपक को ‘हीरो’ बताकर उनकी तारीफ की जा रही है. वहीं, कुछ लोगों ने उनके खिलाफ भी सोशल मीडिया पर लिखा है. दीपक कुमार को राजनीतिक पार्टियों से भी समर्थन हासिल हुआ था. माकपा के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने दीपक के साथ कोटद्वार में पैदल मार्च किया. राहुल गांधी ने भी उनकी ‘भारत के हीरो’ के रूप में तारीफ की.
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