
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए नए ट्रेड पैक्ट से जहां लग्जरी कारों और हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिलों को बड़ी राहत मिली है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों को इस समझौते से बाहर रखे जाने के फैसले ने टेस्ला (Tesla) के लिए भारत में राह और मुश्किल बना दी है। लंबे समय से इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती की पैरवी कर रहे टेस्ला के सीईओ एलॉन मस्क (Elon Musk) को इस फैसले से बड़ा झटका लगा माना जा रहा है।
रॉयटर्स की 7 फरवरी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-अमेरिका के बीच हुए अंतरिम ट्रेड समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से आने वाली हाई-एंड कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी को 110 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा हार्ले-डेविडसन की मोटरसाइकिलों पर लगने वाला इंपोर्ट ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। हालांकि, इस समझौते में इलेक्ट्रिक वाहनों को कोई रियायत नहीं दी गई है। इससे भारत के मार्केट में टेस्ला के विस्तार की उम्मीदों को झटका लगा है, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पैसेंजर व्हीकल मार्केट हैं।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी को भारत–अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील का ऐलान किया था। महीनों की बातचीत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चर्चा के बाद घोषित इस समझौते में अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया था। इसके बदले भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद रोकने पर सहमति दी थी।
रॉयटर्स के हवाले से एक अधिकारी ने बताया कि पेट्रोल-डीजल इंजन वाले और 3,000 सीसी से अधिक क्षमता वाले कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी को अगले 10 सालों में धीरे-धीरे घटाकर 30 प्रतिशत किया जाएगा। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। इसका मतलब यह है कि टेस्ला को भारत में कम टैरिफ के जरिए प्रवेश का रास्ता फिलहाल बंद ही रहेगा। यह फैसला एलॉन मस्क की उस प्रमुख मांग को दरकिनार करता है, जिसमें वे भारत में ऊंचे इंपोर्ट ड्यूटी की लगातार आलोचना करते रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह रुख यूरोपीय ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ भारत के समझौते से अलग है। यूरोपीय यूनियन के साथ ट्रेड एग्रीमेंट में भारत ने कई तरह के वाहनों पर टैरिफ को 10 प्रतिशत तक घटाने का संकेत दिया है, जिसमें कुछ इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चरणबद्ध रियायतें भी शामिल हैं। ऐसे में अमेरिका के साथ हुए समझौते में ईवी को बाहर रखना नीति के स्तर पर अलग संकेत देता है।
भारत में टेस्ला के लिए हालात पहले ही चुनौतीपूर्ण रहे हैं। जनवरी 2026 में जारी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ला पिछले साल भारत में आयात की गई गाड़ियों में से एक-तिहाई भी नहीं बेच पाई। कई शुरुआती बुकिंग कराने वाले ग्राहकों ने बाद में अपनी बुकिंग रद्द कर दी। बाजार में पकड़ बनाने के लिए कंपनी को अपने एसयूवी वेरिएंट्स पर 2 लाख रुपये तक की छूट भी देनी पड़ी है।
टेस्ला ने जुलाई 2025 में भारत में औपचारिक रूप से एंट्री की थी, लेकिन ग्लोबल स्तर पर मांग में सुस्ती के बीच इसका डेब्यू फीका रहा। 2025 में कंपनी की ग्लोबल बिक्री लगातार दूसरे साल घटी। जबकि चीन की BYD दुनिया की सबसे बड़ी ईवी विक्रेता बनकर उभरी। सब्सिडी में कटौती और बढ़ते कॉम्पिटीशन ने अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे बड़े बाजारों में भी टेस्ला की हिस्सेदारी पर दबाव डाला है।
भारत में भी खरीदार सतर्क नजर आ रहे हैं। सीमित ब्रांड पहचान और प्रीमियम कीमतों के कारण मांग कमजोर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई संभावित ग्राहक टेस्ट ड्राइव के बाद टेस्ला की गाड़ी छोड़कर BMW की iX1 या बीवाईडी की सीलायन जैसे विकल्प चुन रहे हैं, जिनकी कीमत भारत में टेस्ला के मॉडल वाई से कम है और फीचर्स भी लगभग मुकाबले के माने जा रहे हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में टेस्ला ने भारत में सिर्फ 227 गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन कराया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई ऐसे ग्राहक जिन्होंने शुरुआती डिपॉजिट जमा किए थे, अब खरीद पूरी करने को लेकर हिचकिचा रहे हैं।
कुल मिलाकर, भारत–अमेरिका ट्रेड पैक्ट से जहां कुछ अमेरिकी ऑटो कंपनियों को सीधा फायदा मिलता दिख रहा है, वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों को बाहर रखने का फैसला टेस्ला के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
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