India-US Trade Deal: ट्रेड डील के बाद भी ट्रंप की धमकी, ऑर्डर में जो लिखा, बहुत डरावना है!

भारत और अमेरिका के बीच 2 फरवरी 2026 को जो ट्रेड डील हुई थी, उस डील पर 7 फरवरी को ट्रंप ने अपनी मुहर लगा दी और उस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर भी साइन कर दिए जिसमें भारत पर लगा 25 फीसदी का पेनल्टी टैरिफ हटा लिया गया लेकिन इस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में ट्रंप की ओर से जो शर्तें रखी गई हैं, वो बेहद डरावनी हैं. ट्रंप ने सारी शर्तों के साथ ये भी शर्त रखी है कि अगर भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया तो ट्रंप फिर से 25 फीसदी की पेनल्टी लगा देंगे और तब टैरिफ 43 फीसदी का हो जाएगा. यहां सवाल ये है कि जब इस ट्रेड डील की शर्तें सार्वजनिक हैं ही नहीं तो ट्रंप ये धमकी कैसे दे सकते हैं और अगर ट्रंप ये धमकियां दे रहे हैं, तो फिर भारत की ओर से कोई भी उनका जवाब क्यों नहीं दे रहा है. आखिर इस ट्रेड डील में ऐसा है क्या, जिसे बताया कम और छुपाया ज्यादा जा रहा है, आज क्लियर कट बात होगी इसी मुद्दे पर.

2 फरवरी को जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर इस ट्रेड डील का ऐलान किया था तो उसमें प्राथमिक तौर पर दो चीजें भारत के हित में नहीं दिख रहीं थीं. पहला था भारत के बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोलना और दूसरा भारत का रूस से तेल खरीदने पर रोक लगाना. सबसे ज्यादा हंगामा और सबसे ज्यादा सवाल कृषि उत्पादों को लेकर ही हुए तो सबसे ज्यादा सफाई भी खेती-किसानी को लेकर ही आई है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ किया है कि भारत ने इस डील में किसी भी राष्ट्रीय हित से रत्ती भर भी समझौता नहीं किया है और भारत के किसानों को इस डील से फायदे के अलावा कोई नुकसान नहीं होने वाला है. एक इंटरव्यू के दौरान जब पीयूष गोयल से सवाल हुआ कि इस डील से भारत के किसानों को नुकसान होगा तो उन्होंने कहा-

‘भारत के किसान जो भी पैदा करते हैं और जिनके लिए भारत किसी दूसरे देश से आयात पर निर्भर नहीं है, उन सभी उत्पादों को इस डील से बाहर रखा गया है. मीट, पोल्ट्री, सभी डेयरी उत्पाद, जेनेटिकली मॉडिफाइड प्रोडक्ट, अनाज यानी कि चावल और गेहूं, चीनी, सोया, कॉर्न, मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, कोडो, अमारंथ, फल जैसे केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, दाल जैसे हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, पशुओं का चारा, मूंगफली, शहद, एथनॉल, तंबाकू और हर वो चीज जो भारत के किसान पर्याप्त मात्रा में पैदा करते हैं, उन्हें इस ट्रेड डील से बाहर रखा गया है.’

इस डील से बाहर रखे गए कृषि उत्पादों के नाम गिनाते हुए पीयूष गोयल ने पूछा कि बचा क्या है, किस बात का डर है. भारत में जो भी अनाज पैदा होता है और जिसकी जरूरत पूरी करने के लिए हमें बाहर से उसे खरीदना नहीं पड़ता है, वो सब इस ट्रेड डील का हिस्सा नहीं है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीयूष गोयल की ही बात को दोहराया है और कहा है कि भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी उत्पाद इस डील में शामिल नहीं है.

दूसरा सवाल है कि क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा, जिसकी बात अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने की है, तो उसपर किसी भी केंद्रीय मंत्री की ओर से कोई क्लियर कट जवाब नहीं है. खुद पीयूष गोयल, जिन्होंने कृषि उत्पादों पर लंबी-चौड़ी सफाई दी है और इस डील को विकसित भारत के संकल्प के लिए जरूरी बताया है, वो भी रूस से तेल खरीद बंद करने के मुद्दे पर कह रहे हैं कि इसका जवाब विदेश मंत्रालय देगा.

विदेश मंत्रालय की ओर से भले ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसका जवाब न दिया हो, लेकिन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 5 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया है कि भारत सरकार की पहली प्राथमिकता भारत के 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है.

2 फरवरी की ट्रंप की ट्रूथ सोशल की पोस्ट और फिर 7 फरवरी को साइन हुआ एग्जीक्यूटिव ऑर्डर कहता है कि भारत रूस से तेल की खरीद बंद कर देगा और अमेरिका से ऊर्जा की जरूरतों का सामान खरीदता रहेगा. इस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में ट्रंप ने ये भी साफ-साफ लिखा है कि अमेरिका का कॉमर्स डिपार्टमेंट और विदेश विभाग इस बात की लगातार निगरानी करेंगे कि भारत रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कच्चा तेल न खरीदे. अगर भारत  दोबारा रूस से तेल खरीदना शुरू करता है, तो पेनाल्टी के तौर पर 25% अतिरिक्त टैरिफ फिर से लगाया जा सकता है. इस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के साइन होने के बाद और अमेरिका की ओर से शर्तें रखे जाने के बाद भी पीयूष गोयल अपने पुराने ही बयान पर कायम हैं और कह रहे हैं कि ट्रेड डील इस बारे में चर्चा नहीं करती कि कौन, क्या और कहां से खरीदेगा.

ट्रंप का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर तो यही कहता है कि अगर भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया और अगर इस बात का पता अमेरिका को लग गया तो ट्रंप भारत पर फिर से 25 फीसदी की पेनल्टी लगा देंगे. ट्रंप ने इस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर को नाम दिया है MODIFYING DUTIES TO ADDRESS THREATS TO THE UNITED STATES BY THE GOVERNMENT OF THE RUSSIAN FEDERATION. ये एग्जीक्यूटिव ऑर्डर कहता है-

‘सेक्रेटरी ऑफ कॉमर्स, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट, सेक्रेटरी ऑफ ट्रेजरी और सेक्रेटरी ऑफ कॉमर्स के दूसरे वरिष्ठ अधिकारी इस बात की निगरानी करेंगे कि एग्जीक्यूटिव ऑर्डर नंबर 14329 के सेक्शन 7 के तहत भारत रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर तेल न खरीदे. अगर सेक्रेटरी ऑफ कॉमर्स को ऐसा कुछ मिलता है कि भारत प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूस से तेल खरीद रहा है तो सेक्रेटरी ऑफ स्टेट, सेक्रेटरी ऑफ ट्रेजरी, सेक्रेटरी ऑफ कॉमर्स, सेक्रेटरी ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी, अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि,राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रपति के ट्रेड और मैन्युफैक्चरिंग के सलाहकार काउंसलर मिलकर मुझे ये बताएंगे कि मुझे भारत पर क्या ऐक्शन लेना है, जिसमें हटाए गए 25 फीसदी टैरिफ को फिर से लागू करना भी शामिल है.’

भारत और अमेरिका की ओर से ट्रेड डील पर जो जॉइंट स्टेटमेंट सामने आया है, उसमें ऐसी कोई धमकी नहीं है, लेकिन अलग से वॉइट हाउस ने अपनी वेबसाइट पर जो एग्जीक्यूटिव ऑर्डर की कॉपी छापी है, उसमें ये धमकी दी गई है और ट्रंप की इस धमकी का जवाब अभी तक भारत की ओर से किसी ने भी नहीं दिया है. ये सब तब है जब इतनी बातें होने के बाद भी इस ट्रेड डील की शर्तें सार्वजनिक नहीं हैं.

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