होंठों से छू लो तुम से कोई फरियाद तक, जगजीत सिंह के जन्मदिन पर सुनें उनकी ये 7 यादगार गजलें

Jagjit Singh Birthday Special: जब भी गजल की बात होती है, सबसे पहला नाम जो जहन में आता है, वो है जगजीत सिंह. 8 फरवरी 1941 को जन्मे इस महान फनकार ने भारतीय संगीत को ऐसी आवाज दी, जो दर्द में भी सुकून ढूंढ लेती थी. उन्होंने गजल को महफिलों और रिकॉर्ड्स से निकालकर आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बना दिया.

जगजीत सिंह की गजलें सिर्फ गाने नहीं थीं, बल्कि टूटे दिलों का सहारा, अधूरी मोहब्बत की आवाज और तन्हाई का सुकून थीं. उन्हें 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया और उनके नाम पर डाक टिकट भी जारी हुआ. आज भले ही वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज आज भी हर दौर में जिंदा है.

होंठों से छू लो तुम

फिल्म प्रेम गीत (1981) का यह गीत जगजीत सिंह के करियर का मील का पत्थर माना जाता है. उनकी आवाज़ और धुन इस गाने को आज भी रोमांटिक क्लासिक बनाती है.

झुकी झुकी सी नजर

फिल्म अर्थ (1982) का यह गजल दर्द और मोहब्बत का खूबसूरत मेल है. कैफी आजमी के बोल और जगजीत-चित्रा सिंह की जुगलबंदी इसे खास बनाती है.

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो

https://www.youtube.com/watch?v=Ju6kNKaBOQ8&list=RDJu6kNKaBOQ8&start_radio=1

फिल्म अर्थ का ही यह गीत आज भी हर उम्र के श्रोताओं से जुड़ जाता है. इसकी सादगी ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है.

वो कागज की कश्ती

https://www.youtube.com/watch?v=tB0hmrY_s0U&list=RDtB0hmrY_s0U&start_radio=1

एल्बम The Latest (1982) का यह गजल बचपन और बीते लम्हों की यादों में ले जाता है. सुदर्शन फ़ाकिर के बोल दिल को छू जाते हैं.

चिट्ठी ना कोई संदेश

1998 में आई यह गजल जुदाई और इंतजार का दर्द बयां करती है. आनंद बख्शी के शब्दों ने इसे और भावुक बना दिया.

होश वालों को खबर

फिल्म सरफरोश (1999) का यह गीत गजल को नई पीढ़ी तक ले गया. इसकी लोकप्रियता आज भी कायम है.

कोई फरियाद

तुम बिन (2001) का यह गीत टूटे दिलों की आवाज़ बन गया. जगजीत सिंह की भावनात्मक गायकी इसे अमर बना देती है.

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