पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के तरलाई कलां इलाके में जहां आज दोपहर 1.30 बजे के आसपास शिया मस्जिद फिदायीन धमाका हुआ था, जिसमें अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है और 170 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं. अब इस मामले में एक नई कड़ी सामने आई है. जिस वक्त शिया मस्जिद कसर-ए-खदीजातुल कुबरा में फिदायीन हमलावर ने खुद को उड़ाया था. ठीक उसी समय एक किलोमीटर दूर जामिया मस्जिद कमर उल इस्लाम में शिया विरोधी आतंकी संगठन सिपाह-ए-सहाबा का शिया समुदाय के विरोध में खत्म ए नबुव्वत प्रोग्राम चल रहा था, जिसमें मुख्य अतिथि सिपाह-ए-सहाबा का प्रमुख मुफ्ती औरंगजेब फारूकी था.
11 मिनट के अपने भाषण में सिपाह-ए-साहबा का प्रमुख मुफ्ती औरंगजेब फारूकी ने कई बार शिया समुदाय पर निशाना साधा और लोगों को शिया समुदाय के खिलाफ भड़काया. सिपाह-ए-सहाबा के प्रमुख मुफ्ती औरंगजेब फारूकी को सुनने वाले हर बार उसकी शिया विरोधी तकरीर सुनने के बाद ‘सहाबा सहाबा’ के नारे लगाते रहे. हालांकि शिया समुदाय की इस्लामाबाद में मस्जिद पर फिदायीन हमला किस आतंकी संगठन ने किया ये अभी तय नहीं हो पाया है, लेकिन पाकिस्तान की सरकार की तरफ से थोड़ी देर पहले जानकारी दी गई कि फिदायीन हमलावर की शिनाख्त कर ली गई है और वो पाकिस्तान का ही नागरिक था, लेकिन कई बार अफगानिस्तान भी गया था.
कब-कब शिया समुदाय पर कहर बनकर टूटा सिपाह-ए-सहाबा?

पाकिस्तान में आतंकी संगठन सिपाह-ए-सहाबा और उसके छद्म नाम लश्कर-ए-झांगवी कई बार शिया समुदाय पर आतंकी हमले कर चुके हैं, जिसमें फिदायीन हमले भी शामिल हैं. 1990 से 1999 तक सिपाह-ए-सहाबा ने शिया डॉक्टर, वकील, प्रोफेसर पर आतंकी हमले करके उन्हें मौत के घाट उतारा था, जिसके बाद मार्च 2004 में क्वेटा में सिपाह-ए-सहाबा ने मोहर्रम के 10 वें दिन अशूरा के समय फिदायीन हमला किया था, जिसमें 40 शिया समुदाय के लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद सितंबर 2010 में सिपाह-ए-सहाबा ने क्वेटा में शिया जलूस पर फिदायीन हमला किया, जिसमें 70 लोगों की जान गई. जनवरी 2013 में हजारा शिया की मस्जिद में बम विस्फोट इसी आतंकी संगठन ने करवाया था, जिसमें 96 लोगों की जान गई थी और फिर 2013 में क्वेटा के हजारा इलाके में सिपाह-ए-सहाबा ने फिदायीन हमला किया था, जिसमें शिया समुदाय के 114 लोगों की जान गई थी.
सिपाह-ए-सहाबा पर साल 2002 में PAK ने लगाया प्रतिबंध
आतंकी संगठन सिपाह-ए-सहाबा पर पाकिस्तान की सरकार ने साल 2002 में प्रतिबंध लगाया था, लेकिन उसके बाद भी उसका काम बंद नहीं हुआ. दुनिया को दिखाने के लिए उसने अपना नया नाम अहले सुन्नत वल जमात रख लिया और शिया आबादी के खिलाफ आतंक के काम के लिए कभी सिपाह ए सहाबा तो कभी लश्कर ए झांगवी नाम का इस्तेमाल किया. इसी के तहत फरवरी 2014 में पेशावर, 2015 में रावलपिंडी और 2017 में परचिनार में सिपाह ए साहब ने लश्कर ए झांगवी नाम से शिया आबादी को बम विस्फोट से निशाना बनाया. ऐसे में आज इस्लामाबाद के तरलाई कलां में जुमे की नमाज के लिए शिया मस्जिद कसर-ए-खदीजातुल कुबरा में इकट्टा हुए सैकड़ों लोगो पर फिदायीन धमाका करने के पीछे शक की सुई आतंकी संगठन सिपाह ए सहाबा पर भी घूम रही है क्योंकि ठीक एक किलोमीटर मीटर दूर उसके जलसे का आयोजन हो रहा था.
TTP ने खुद को हमले से किया दूर
इस्लामाबाद में शिया मस्जिद में हुए आत्मघाती फिदायीन हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी भी पाकिस्तानी आतंकी संगठन ने नहीं ली है. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने इस हमले से बयान जारी करके खुद को दूर कर लिया है. ऐसे में शक की सुई फिलहाल आतंकी संगठन सिपाह-ए-सहाबा और इस्लामिक स्टेट खोरासान (ISKP) की ओर घूम रही है, जो शिया आबादी पर ऐतिहासिक रूप से इसी तरह फिदायीन हमले करते रहते हैं. साथ ही जिस तरह से शिया मस्जिद से ठीक एक किलोमीटर दूर जिस तरह आतंकी संगठन सिपाह-ए-सहाबा का शिया विरोधी कार्यक्रम होने दिया गया, वो भी इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि पाकिस्तान की सरकार को अपने देश में शिया आबादी की सुरक्षा से लेना-देना नहीं है.
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