
शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला 6 फरवरी को भी जारी रहा। सेंसेक्स और निफ्टी सुबह में कमजोर खुले। थोड़ी देर बाद दोनों में कुछ रिकवरी दिखी। लेकिन, बिकवाली दबाव बढ़ने से दोनों सूचकांक फिसल गए। 10:50 बजे निफ्टी 0.55 फीसदी यानी 140 प्वाइंट्स गिरकर 25,500 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.42 फीसदी यानी 349 अंक गिरकर 82,970 पर चल रहा था। 11:35 बजे तक सेंसेक्स और निफ्टी में फिर रिकवरी दिखी। सेंसेक्स 27 अंक गिरकर 83286 पर चल रहा था, जबकि निफ्टी 29 अंक गिरकर 25,612 पर था।
Nifty IT, Nifty Bank, Nifty Smallcap Index का बड़ा हाथ रहा। आईटी शेयरों में गिरावट से निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.09 फीसदी टूट गया। निफ्टी बैंक इंडेक्स में भी 0.63 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। आईटी स्टॉक्स में लगातार तीसरे दिन बड़ी गिरावट दिखी। TCS, Infosys, HCL Tech, Wipro, LTIMindtree, Persistent Systems जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयर 3 फीसदी तक गिर गए।
बीते तीन दिनों में निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 9 फीसदी गिर चुका है। अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक के नए लीगल एआई टूल लॉन्च होने के बाद से आईटी कंपनियों में बिकवाली थमने का नाम नहीं ले रही है। 6 फरवरी को सोलर इंडस्ट्रज, इंफोएज, डिवीज लैब्स, हिंदुस्तान जिंक, एवेन्यू सुपरमार्ट्स, पंजाब नेशनल बैंक के शेयरों पर भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्केट का सेंटिमेंट कमजोर है।
इन वजहों से आई बड़ी गिरावट:
1. अमेरिकी मार्केट में बड़ी गिरावट
अमेरिकी मार्केट्स में 5 फरवरी को बड़ी गिरावट आई थी। लगातार तीसरे दिन अमेरिकी मार्केट्स के सूचकांक फिसले। इसमें टेक्नोलॉजी कंपनियों में कमजोरी का बड़ा हाथ है। 5 फरवरी को चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर बड़ा दबाव दिखा। Amazon का शेयर 10 फीसदी तक टूट गया था। अमेरिकी मार्केट में गिरावट का असर 6 फरवरी को भारत सहित ज्यादातर एशियाई शेयर बाजारों पर पड़ा।
2. आईटी शेयरों में कमजोरी
लगातार दिन आईटी शेयरों में भारत में बड़ी गिरावट दिखी। इनमें टीसीएस, इंफोसिस जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयर शामिल हैं। आईटी शेयरों में बड़ी कमजोरी ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया। आईटी शेयरों के निवेशकों में डर का माहौल है। एनालिस्ट्स का कहना है कि एंथ्रोपिक के नए एआई टूल्स का असर आईटी कंपनियों के बिजनेस पर पड़ सकता है।
3. उम्मीद से कमजोर अर्निंग्स ग्रोथ
दिसंबर तिमाही में ज्यादातर कंपनियों के नतीजे आ गए हैं। तीसरी तिमाही के नतीजों में इम्प्रूवमेंट दिखा है। लेकिन, अर्निंग्स ग्रोथ एनालिस्ट्स की उम्मीद से कम रही है। इसका मतलब है कि अर्निग्स ग्रोथ बढ़ने के लिए अब चौथी तिमाही के नतीजों का इंतजार करना पड़ेगा। एनालिस्ट्स का कहना है कि कंजम्प्शन बढ़ने के बावजूद कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ में ज्यादा इम्प्रूवमेंट नहीं दिख रही है।
4. जियोपॉलिटिकल टेंशन
अमेरिका के भारत पर टैरिफ घटाने और ट्रेड डील के ऐलान का पॉजिटिव असर मार्केट पर पड़ा था। लेकिन, एनालिस्ट्स का कहना है कि अब भी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। 6 फरवरी को मस्कट में दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर डील पर बातचीत होने वाली है। अगर बातचीत के नतीजे सकारात्मक नहीं निकलते हैं तो ग्लोबल मार्केट्स पर इसका असर पड़ेगा। उधर, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म होने के ठोस संकेत नहीं दिखे हैं।
5. RBI की मॉनेटरी पॉलिसी
आरबीआई ने 6 फरवरी को मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान किया। उसने इंटरेस्ट रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया। हालांकि, इसकी उम्मीद पहले से थी। लेकिन, एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की होती तो इसका बाजार पर पॉजिटिव असर पड़ सकता था।
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