Sankashti Chaturthi Vrat Katha: फाल्गुन द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर पढ़ें ये व्रत कथा, वरना अधूरी रहेगी पूजा

Sankashti Chaturthi 2026 Vrat Katha:

हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व होता है, यह तिथि भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित होती है. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है संकटों से मुक्ति दिलाने वाली तिथि. वहीं फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है.

आज गुरुवार 5 फरवरी 2026 फाल्गुन मास की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है. आज भक्त शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से गौरी पुत्र गणेश की पूजा करते हैं और रात्रि में चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं. संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय रात 09 बजकर 35 मिनट पर होगा.

संकष्टी चतुर्थी की पूजा में भक्तों को इससे जुड़ी व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. यदि आप किसी कारण कथा का पाठ नहीं कर सकते तो, श्रवण जरूर करें. मान्यता है कि, इस कथा के पाठ या श्रवण के बिना पूजा और व्रत अधूरी मानी जाती है.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (Dwijapriya Sankashti Chaturthi vrat katha)

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी से जुड़ी प्रचलित कथा के अनुसार, माता पार्वती एक बार पुत्र गणेश से फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी व्रत के बारे में पूछती हैं. तब भगवान गणेश जवाब देते हैं- हे माता! फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है. मैं आपको इस कथा का वर्णन करता हूं.

प्राचीन समय में युवनाश्व नाम का एक दयालु और धर्मनिष्ठ राजा राज्य करता था. उसी राज्य में विष्णुशर्मा नामक एक ब्राह्मण था, जिसके 7 पुत्र थे. लेकिन ब्राह्मण के परिवार में कलह-क्लेश का माहौल रहता है, जिस कारण उसके सभी पुत्र अलग-अलग स्थानों पर रहने लगे. ब्राह्मण विष्णुशर्मा हर दिन बारी-बारी से अपने पुत्रों के घर पर भोजन करने जाया करते थे. धीरे-धीरे समय बीता और वे शारीरिक रूप से अधिक वृद्ध व दुर्बल हो गए. बहुएं भी अपने ससुर का तिरस्कार करने लगी.

एक दिन संकष्टी चतुर्थी थी. विष्णुशर्मा अपनी बड़ी बहू के घर जाकर बोले- आज मेरा भगवान गणेश का व्रत है, तुम मेरे लिए पूजा सामग्री की व्यवस्था कर दो, तम्हें भगवान गणेश का आशीर्वाद मिलेगा. लेकिन बहू ने घर के अनेक कामों का बहाना देकर मना कर दिया. ब्राह्मण विष्णुशर्मा वहां से चले गए. एक-एक कर वे सभी बहुओं के घर गए, लेकिन किसी ने उनके लिए पूजा सामग्री की व्यवस्था नहीं की. तब आखिर में वे छोटी बहू के घर गए, जोकि बहुत निर्धन थी. छोटी बहु की आर्थिक स्थिति देख पहले तो विष्णुशर्मा उससे कहने में हिचकिचाने लगे. लेकिन छोटी बहू ने ससुर ने स्नेहपर्वक कहा कि, वह भी उनके साथ यह व्रत करेगी और तुरंत पूजा सामग्री एकत्र करने में लग गई. इसके बाद छओटी बहू और विष्णुशर्मा ने विधिपूर्वक भगवान गणेश का पूजन किया.

पूजा के बाद रात्रि में उन्होंने व्रत खोला. व्रत के प्रभाव से छोटी बहू का घर धन-संपत्ति से भर गया. भगवान गणेश ने ब्राह्मण की पुत्र वधू की पूजा और दयालुता से प्रसन्न होकर उसे कुबेर समान धन प्रदान किया. इसलिए कहा जाता है कि, जो भी यह व्रत करता है, उसकी सारी समस्याएं दूर होती हैं.

ये भी पढ़ें: Sankashti Chaturthi 2026: संकष्टी चतुर्थी पर करें इन मंत्रों का महाजाप, बप्पा हरेंगे सारे संकट

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Read More at www.abplive.com