Dwijpriya sankashti chaturthi 2026: 5 फरवरी 2026 को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत है. समस्त दोषों से मुक्ति और संतान सुख के लिए ये व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन गणपति जी की पूजा के अलावा चंद्रमा की आराधना बहुत खास मानी जाती है. भारत में संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय समय शहर अनुसार अलग-अलग होता है. ऐसे में फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी का चांद आपके शहर में कब निकलेगा यहां जान लें.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 चंद्रोदय समय
| दिल्ली | रात 9 बजकर 35 मिनट |
| मुंबई | रात 9 बजकर 50 मिनट |
| लखनऊ | रात 9 बजकर 19 मिनट |
| पटना | रात 9 बजकर 01 मिनट |
| नोएडा | रात 9 बजकर 34 मिनट |
| हैदराबाद | रात 9 बजकर 26 मिनट |
| गोरखपुर | रात 9 बजकर 9 मिनट |
| भोपाल | रात 9 बजकर 32 मिनट |
| इंदौर | रात 9 बजकर 39 मिनट |
| जयपुर | रात 9 बजकर 40 मिनट |
| आगरा | रात 9 बजकर 31 मिनट |
| चंडीगढ़ | रात 9 बजकर 37 मिनट |
| अहमदाबाद | रात 9 बजकर 52 मिनट |
दुख-दरिद्रता को दूर करने वाली चतुर्थी
यह तिथि दुख और बाधाओं को दूर करने वाली मानी जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से व्रत रखकर गणपति बप्पा की पूजा करते हैं, उनके जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं.
चंद्रमा पूजा विधि
फाल्गुन की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का चंद्रमा जब आसमान में दिख जाए तब लौटे में जल भरकर थोड़ा कच्चा दूध लें और थोड़ी सी चीनी भी मिला लें. फिर भगवान गणेश का ध्यान करते हुए चंद्र देवका का ध्यान करते हुए अर्घ्य दें. चंद्र दर्शन के समय संतान का स्मरण कर अर्घ्य देने से संतान पर आने वाले संकट टलते हैं. ऐसी मान्यता है. अकाल भय, रोग और मानसिक कष्ट दूर होते हैं.
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