दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका और रूस के बीच इस बार आर्म्स कंट्रोल ट्रीटी यानी मुख्य हथियार संधि खत्म हो जाएगी. अब ऐसे में शीत युद्ध के बाद पहली बार दुनिया में एटमिक हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है. पॉलिटिको वेबसाइट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने एक नई संधि बनाने का संकेत पिछले साल सितंबर में दिए थे, लेकिन अमेरिका की तरफ से किसी भी तरीके की प्रतिक्रिया नहीं दिखाई गई थी. गुरुवार को New Start संधि खत्म हो जाएगी. यह 2010 में हुई थी. इसमें दोनों देशों ने एटमिक हथियारों की संख्या तय की थी. इसमें मिसाइल, बॉम्बर और वॉरहेड शामिल थे.
चीन-रूस परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ा रहे
यह संधि ऐसे समय खत्म हो रही है, जब दुनिया एक तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रही है. एक तरफ चीन और रूस स्ट्रेटिजिकली हथियारों का जखीरा बढ़ा रहे हैं, तो रूस ने यूक्रेन पर परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की धमकी दे रखी हुई है. Politco के मुताबिक, इन मामलों में दो लोगों और एक अन्य जानकार ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि रक्षा मंत्रालय ने संधि को खत्म होने के बाद की दुनिया को लेकर कई मीटिंग की हैं. इनमें जो बैठकें हुई हैं, उससे जुड़ी जानकारी फिलहाल नहीं है.
आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डेरिल किम्बल ने बताया कि हम एक अनिश्चित रास्ते की ओर देख रहे हैं. अगर दोनों देश किसी नतीजे पर नहीं पहुंचते हैं, तो दोनों देश अपनी-अपनी मिसाइलों पर ज्यादा से ज्यादा वॉरहेड लगाना शुरू कर देंगे. जहां पिछले एक दशक में रूस ने अपनी परमाणु ताकत को बढ़ाया है, वैसे ही चीन ने भी इनका भंडार दो गुना किया है. हालांकि, अमेरिका ने जरूर थोड़ी कटौती की है.
क्या ट्रंप किसी तरह का नया समझौता करना चाहते हैं?
ट्रंप ने संकेत दिया है कि एक नया समझौता चाहते हैं. लेकिन वह इसमें चीन को भी शामिल करना चाहते हैं. इसके अलावा पुतिन ने जो सितंबर में प्रस्ताव दिया था, उसके तहत यह समझौता एक साल और बढ़ जाता, लेकिन हथियार को निरीक्षण पर रोक लगा देता. पुतिन की मांग है कि ब्रिटेन और फ्रांस भी एक फॉलोअप संधि में भाग लें. दोनों देश पनडुब्बियों से परमाणु मिसाइलें लॉन्च कर सकते हैं. या इन्हें गिराने के लिए लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, चीन ने हथियारों के कंट्रोल से जुड़ी संधि में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है.
अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि ट्रंप न्यूक्लियर हथियारों के कंट्रोल के आगे की रणनीति तय करेंगे. वह अपनी टाइमलाइन के हिसाब से इसे करेंगे. इसके अलावा NYT को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि एक बेहतरीन डील होगी. अगर यह खत्म होता है, तो खत्म हो जाए. हम एक बेहतर समझौता करेंगे.
बिना परमाणु संधि के होंगे रूस और अमेरिका, यूरोप भी कर सकता है होड़
इस संधि के खत्म होने से लगभग दोनों देशों के बीच किसी भी तरह से परमाणु हथियार कंट्रोल संधि नहीं होगी. यह अमेरिकी के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के समय से थी. अब आगे क्या हो सकता है, इस पर अनुमान है कि दशकों में पहली बार यूरोप भी इन हथियारों की होड़ में शामिल हो सकता है. वह भी हथियार का प्रसार या निर्माण कर सकता है. जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने महाद्वीप पर एक सेटअप बनाने पर चर्चा शुरू कर दी है. स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने कहा है कि उन्होंने परमाणु क्षमताएं विकसित करने के लिए फ्रांस, यूके से राजनयिक बातचीत शुरू कर दी है.
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