
SGB Tax Rule: बजट 2026-27 ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। टैक्स छूट खत्म होने की खबर से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की कीमतों में सोमवार 2 फरवरी को 10% तक की भारी गिरावट आई। बजट में शेयर मार्केट से गोल्ड बॉन्ड खरीदने वालों निवेशकों के लिए टैक्स छूट के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आई भारी गिरावट ने भी निवेशकों की चिंता में इजाफा किया।
दोपहर 1 बजे के करीब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर, SGBDEC26 सीरीज 1,760 रुपये या 10 प्रतिशत टूटकर 15,840 रुपये पर आ गई। इसी तरह SGBSEP31II में भी 10 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और इसका भाव 14,575.77 रुपये पर पहुंच गया। SGBJAN27 सीरीज भी दबाव में रही और इसमें करीब 10 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 14,296.50 रुपये पर कारोबार करती दिखी।
बजट के बाद क्यों बढ़ी बिकवाली?
हालांकि सरकार ने अब इस टैक्स छूट को लेकर स्थिति साफ करने का फैसला किया है। बजट में प्रस्ताव किया गया है कि यह कैपिटल गेन टैक्स छूट केवल उन्हीं मूल निवेशकों को मिलेगी, जिन्होंने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को सीधे जारी होते समय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से खरीदा था और 8 साल की मैच्योरिटी तक अपने पास रखा हो।
इसका मतलब यह है कि जो निवेशक SGB को शेयर मार्केट से खरीदते हैं और फिर मैच्योरिटी पर रिडीम करते हैं, उन्हें इस टैक्स छूट का अब लाभ नहीं मिलेगा। यही बदलाव निवेशकों के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ और शेयर मार्केट में बिकवाली तेज हो गई।
कब से लागू होगा नया नियम?
सरकार का नया प्रस्तावित नियम 1 अप्रैल से लागू होगा और वित्त वर्ष 2026-27 तथा उसके बाद के सालों के लिए प्रभावी रहेगा। फाइनेंस बिल 2026 में यह स्पष्ट किया गया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से जारी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को भुनाने से होने वाला कोई भी कैपिटल गेन तभी पूरी तरह टैक्स फ्री होगा, जब वह किसी व्यक्ति ने उसे मैच्योरिटी तक होल्ड किया हो।
SGB क्या हैं और क्यों लोकप्रिय रहे हैं?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, सरकार के सपोर्ट वाले बॉन्ड होते हैं जो निवेशकों को बिना फिजिकल सोना खरीदे सोने में इन्वेस्ट करने में मदद करते हैं। इन्हें सरकार की तरफ से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जारी करता है। इनकी वैल्यू सोने की कीमतों के साथ बदलती रहती है। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी से होने वाले फायदे के साथ-साथ, निवेश को इन बॉन्ड्स पर 2.5 परसेंट का फिक्स्ड सालाना इंटरेस्ट रेट भी मिलता है, जो हर छह महीने में दिया जाता है। इन बॉन्ड्स की मैच्योरिटी की अवधि आठ साल होती है। हालांकि पांच साल बाद समय से पहले निकासी का विकल्प भी दिया जाता है।
फिजिकल गोल्ड के मुकाबले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में स्टोरेज, सेफ्टी और शुद्धता जैसी कोई चिंता नहीं होती। इसके अलावा, ये बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड भी होते हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर निवेशक इन्हें सेकेंडरी मार्केट में बेच सकते हैं।
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