रुपए की मजबूती के लिए अभी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं, FTA से विकसित देशो में भारत की पहुंच होगी आसान – वी अनंत नागेश्वरन – no need for intervention to strengthen the rupee at present free trade agreements will facilitate india access to developed countries anantha nageswaran

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल संसद में इकोनॉमिक सर्वे पेश किया। आर्थिक सर्वे में इकोनॉमी की अच्छी तस्वीर पेश की गई है। ग्लोबल अनिश्चितता के बावजूद आगे ग्रोथ की तेज रफ्तार जारी रहने की उम्मीद जताई गई है। साथ ही विदेशी निवेश और स्वदेशी दोनों की जरूरत पर जोर दिया गया है। इकोनॉमिक सर्वे के आने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने सीएनबीसी-आवाज़ के साथ हुई बातचीत में ग्रोथ को कैसे मिलेगा दम,क्या होगी ग्लोबल चैलेंज थमने की टाइमलाइन और स्वदेशी में क्या नया करने की जरूरत है, जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखी।

ग्रोथ को ग्लोबल चैलेंज कब तक?

अनंत नागेश्वरन ने कहा कि ग्लोबल चैलेंज कब तक बना रहेगा, इसका जवाब नहीं है। ग्लोबल चैलेंज पर कोई टाइमलाइन नहीं है। कोई नहीं बता सकता ग्लोबल चैलेंज कब खत्म होगा। ग्लोबल चैलेंज वर्ल्ड लीडर्स पर निर्भर करता है।

नॉर्मल ग्लोबल वर्ल्ड ऑर्डर की संभावना कब ?

नॉर्मल ग्लोबल वर्ल्ड ऑर्डर का इंतजार नहीं है। किसी भी सामान्य हालात का इंतजार नहीं कर सकते। ग्लोबल सिचुएशन के हिसाब से ही फैसले लेने होंगे। दावोस इकोनॉमिक फोरम में कुछ -कुछ ऐसा ही दिखा है। हालातों के हिसाब से पॉलिसी रखनी होगी।

स्वदेशी पर क्या नया करने की जरूरत?

स्वदेशी अभी एक फिलॉसफी की तरह है। स्वदेशी को अभी एक्शन की तरह करना होगा। वर्ल्ड ऑर्डर काफी बदल चुका है। हमें स्वदेशी की तरफ बढ़ना होगा। स्वदेशी स्ट्रैटेजी के लिए फ्रेमवर्क तैयार करना होगा।

FTA से भारतीय मैन्युफैक्चर्स को कितना फायदा?

FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) से एडवांस कंट्री में भारतीय पहुंच आसान हुई है। क्वालिटी को लेकर थोड़ा ज्यादा फोकस करना होगा। दाम कम, क्वालिटी ज्यादा का मंत्र ज्यादा कारगर रहेगा। दाम और क्वालिटी रखने पर मैन्युफैक्चरर्स को सुविधा मिलेगी।

गोल्ड-सिल्वर कीमतों में इतनी तेजी क्यों ?

गोल्ड-सिल्वर पर आर्थिक और राजनीतिक माहौल में अनिश्चितता का असर देखने को मिल रहा है। जियोपॉलिटिक्स और करेंसी वॉर बड़े फैक्टर्स हैं। डॉलर, येन पर चिंता से भी गोल्ड-सिल्वर की ओर रुझान बढ़ा है। गोल्ड -सिल्वर एक तरह का रियल एसेट है। डर की वजह से गोल्ड-सिल्वर में निवेश बढ़ा है।

रुपए पर क्या रणनीति?

रुपए की कमजोरी में अभी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। रुपए को मार्केट फोर्स पर रखने की रणनीति है। ग्लोबल कैपिटल आउटफ्लो से करेंसी में कमजोरी आई है। ज्यादा ग्लोबल इंटरेस्ट की वजह से ग्लोबल कैपिटल आउटफ्लो देखने को मिला है। अभी भारत में कैपिटल इनफ्लो कमजोर है। कैपिटल फ्लो कमजोर रहने से भी करेंसी पर असर आया है। कैपिटल इंपोर्टिंग देशों में करेंसी कमजोर हो जाती है। रुपए की मजबूती के लिए अभी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं।

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