पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख CDF फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अक्सर किसी न किसी बात को लेकर चर्चाओं में बने रहते हैं. फिर चाहे वह वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान सूट के अंदर बुलेट प्रूफ जैकेट पहनना हो या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ लंच करना हो, लेकिन आज जो बात सामने आई है वो बेहद हैरान करने वाली है.
दरअसल, कुछ दिन पहले एबीपी न्यूज ने ISI के अधिकारी और उसके एसेट मेजर रिटायर्ड आतिफ इकराम के बीच हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग के जरिए खुलासा किया था कि कैसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI पाकिस्तानी चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) जनरल आसिम मुनीर के पश्चिमी देशों में रहने वाले आलोचकों को शांत करवाने के लिए उनकी हत्या या फिर डराने के लिए घर पर हमला करने की योजना बना रहे हैं.
इस खुलासे में एक नाम सामने आया था पाकिस्तानी सेना के रिटायर्ड मेजर आदिल राजा का, जो लगातार जनरल आसिम मुनीर की ओर से पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन और राजनैतिक हस्तक्षेप का विरोध करते रहते हैं और हमारे खुलासे में यह भी सामने आया था कि ISI आदिल राजा को शांत करवाने के लिए उनकी हत्या या फिर घर पर हमला करके मारने की योजना बना रही है.
आदिल राजा के घर पर 24 दिसंबर को किया गया था हमला
साथ ही 24 दिसंबर, 2025 को मेजर रिटायर्ड आदिल राजा के घर पर हमला हुआ भी था, जब वो परिवार के साथ छुट्टी मनाने गए थे. अब इसी कड़ी में ब्रिटेन की काउंटर टेररिज्म पुलिस ने आदिल राजा के घर पर उनके साथ मारपीट करने के इरादे से हमला करने वाले तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है.
जानकारी के मुताबिक, आसिम मुनीर की नीतियों के आलोचक ब्रिटेन में निर्वासित रिटायर्ड मेजर आदिल राजा के घर पर हमला करने वालो में वारविकशायर काउंटी के बेडवर्थ शहर का युवक कार्ल ब्लैकबर्ड, कोवेंट्री शहर का युवक क्लार्क मैकाले और बर्मिंघम शहर का लुईस रेगन शामिल था.
25 साल के ब्रिटिश युवक ने बनाया था हमले का प्लान
ब्रिटेन के कोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, बर्मिंघम में रहने वाले 25 साल के युवक लुईस रेगन को आसिम मुनीर के आलोचक रिटायर्ड मेजर आदिल राजा के घर पर हमला करने का ठेका और पैसा दिया गया था. जिसके बाद उसने अपने दो अन्य साथी कार्ल ब्लैकबर्ड और क्लार्क मैकाले के साथ मिलकर प्लान बनाया कि आखिर कब और कैसे आदिल राजा पर घर में घुस कर हमला किया गया जाएगा.
एबीपी न्यूज को भेजे गए अपने जवाब में ब्रिटेन की पुलिस ने जानकारी दी है कि आदिल राजा के ऊपर हुआ हमला टार्गेटेड था. हालांकि, ये हमला क्या पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने करवाया था इस पर फिलहाल कोई जवाब ब्रिटेन की पुलिस ने नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ब्रिटेन की पुलिस को कुछ ऐसे साक्ष्य मुहैया करवाए गए हैं, जिससे प्रतीत होता है कि आसिम मुनीर की नीतियों के आलोचक पूर्व पाकिस्तानी मेजर आदिल राजा ISI की हिटलिस्ट पर हैं और ISI ने उन पर दबाव बनाने के लिए हमला करवाया हो सकता है.
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की भूमिका की हो रही जांच
इसके साथ ही इस ISI एंगल की जांच भी सूत्रों के मुताबिक ब्रिटेन की काउंटर टेररिज्म पुलिस (CTP) और SO-15 कर रही है, क्योंकि अगर ये साबित हुआ की चेशम में आदिल राजा के घर पर हुआ हमला ISI ने करवाया था, तो यह ट्रांसनेशनल रिप्रेशन का मामला बनेगा. इससे पाकिस्तान और ब्रिटेन के बीच राजनयिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है.
इमरान खान के सहयोगी पर भी UK में किया गया था हमला
ब्रिटेन में आदिल राजा के अलावा पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के सहयोगी और उनके प्रधानमंत्री काल के दौरान उनके सलाहकार मिर्जो शहजाद अकबर पर भी 24 दिसंबर, 2025 और 31 दिसंबर, 2026 को कैंब्रिज में हमला हुआ था. जिसमें घर में घुसकर शहजाद अकबर के साथ मारपीट हुई थी और आरोपियों ने उसकी वीडियो बनाया था. इसके साथ ही उन्हें हथियारों से डराया भी गया था.
जानकारी के मुताबिक, शहजाद अकबर पर भी हमले का प्लान बर्मिंघम शहर का लुईस रेगन ने 3 अन्य साथियों के साथ मिलकर ही बनाया था. आदिल राजा और मिर्जा शहजाद अकबर पर हमले को अंजाम देने के लिए एक चैट-बॉट भी बनाया गया था, जिसमें सारी प्लानिंग की गई थी और रेकी की तस्वीरें डाली गई थी.
शहजाद और आदिल पर एक ही दिन किया गया था हमला
इतना ही नहीं, शहजाद अकबर और आदिल राजा पर हमला करने का एक ही दिन 24 दिसंबर, 2025 और एक ही समय सुबह 8 बजे चुना गया था, जिसमें हमला प्लान करने वाला लुईस रेगन अपने एक साथी के साथ कैम्ब्रिज स्थित शहजाद अकबर के घर गया और मारपीट करके शहजाद अकबर को लहूलुहान किया और तस्वीरें खींचकर किसी को भेजी, जिसका पता ब्रिटेन की पुलिस लगा रही है. इसके साथ ही आदिल राजा के घर पर ठीक इसी समय क्लार्क मैकाले और कार्ल ब्लैकबर्ड पहुंचे, लेकिन आदिल राजा के घर पर ना होने पर दोनों ने मकान में तोड़फोड़ की और फिर 31 दिसंबर को हथियार के साथ शहजाद अकबर को डराया गया, जिसमें एक चौथा आरोपी डेनेटो भ्रैमर शामिल था और अभी ब्रिटेन की पुलिस की गिरफ्त में है.
ऐसे मामलों में ISI के मेजर जनरल फैसल नसीर का नाम आ चुका है सामने
कुल मिलाकर ये दोनों हमले किसने करवाए इसकी जांच ब्रिटेन की काउंटर टेररिज्म पुलिस कर रही है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, इस प्रकार के पश्चिमी देशों में कॉर्डिनेटेड हमले करवाने में ISI की काउंटर टेररिज्म यूनिट को महारत हासिल है. जिसका प्रमुख इस समय मेजर जनरल फैसल नसीर उर्फ डर्टी हैरी है. कुछ साल पहले केन्या में पाकिस्तानी पत्रकार अरशद शरीफ की भी कुछ इसी तरह से हत्या कर दी थी, जिसमें भी ISI के डीजी-C मेजर जनरल फैसल नसीर उर्फ डर्टी हैरी का नाम आया था और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने आरोप लगाया था कि अरशद शरीफ की हत्या मेजर जनरल फैसल नसीर उर्फ डर्टी हैरी ने करवाई थी. क्योंकि वो शहबाज शरीफ और आसिफ अली जरदारी की करतूतें पत्रकार होने के नाते एक्सपोज कर रहा था. ऐसे में देखना होगा की ब्रिटेन की पुलिस की जांच में आदिल राजा और शहजाद अकबर पर हमला करवाने के पीछे कौन-सी ताकतों के नाम सामने आते हैं.
घर पर हमले को लेकर क्या बोले आदिल राजा
अपने घर और शहजाद अकबर पर हुए हमले पर रिटायर्ड मेजर आदिल राजा ने एबीपी न्यूज को भेजे अपने एक्सक्लूसिव जवाब में कहा कि मेरे साथ और शहजाद अकबर के साथ जो हो रहा है, उसे अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जा सकता है. यह पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी के चलाए जा रहे एक लंबे और सुनियोजित अभियान का हिस्सा है, जिसका मकसद सच बोलने वालों को डराना और चुप कराना है.
आदिल राजा के मुताबिक, कई सालों से पाकिस्तान की एजेंसियां उन्हें निशाना बना रही है, क्योंकि उन्होंने मानवाधिकार उल्लंघन, भ्रष्टाचार और सेना के शीर्ष अधिकारियों द्वारा सत्ता के दुरुपयोग को उजागर किया, उनका पासपोर्ट रद्द किया गया, संपत्ति जब्त की गई और गैरहाजिरी में कोर्ट-मार्शल किया गया. साथ ही उनकी मां को पाकिस्तान में अगवा करके बंधक जैसी हालत में रखा गया, लेकिन इसके बाद भी जब वो चुप नहीं हुए तो डराने-धमकाने की यह मुहिम यूनाइटेड किंगडम (UK) तक पहुंच गई.
असहमति रखने वालों को दुश्मन की तरह देखती है तानाशाही व्यवस्था- आदिल
आदिल ने कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां, खासकर ISI, सीमाओं तक सीमित नहीं रहतीं और ब्रिटेन में उनके और शहजाद अकबर के घरों पर हुए हमले यह दिखाते हैं कि एक तानाशाही व्यवस्था कितनी दूर तक जाकर पत्रकारों और असहमति रखने वालों को दुश्मन की तरह देखती है. यह कानून या अपराध का मामला नहीं है, बल्कि सच बोलने की सजा देने की कोशिश है. सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने एक ऐसे फासीवादी सिस्टम को आईना दिखाया, जो जवाबदेही बर्दाश्त नहीं कर सकता है. ऐसे में अब जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान दिया जाए और जवाबदेही तय की जाए.
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