Why Indians Get Heart Attacks Early: भारत में हार्ट की बीमारियां तेजी से एक गंभीर चिंता बनती जा रही हैं. बीते कुछ वर्षों में हार्ट अटैक के मामलों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है और चौंकाने वाली बात यह है कि अब यह समस्या वेस्टर्न देशों की तुलना में कहीं कम उम्र के लोगों को भी अपनी चपेट में ले रही है. इसकी एक बड़ी वजह खून में बढ़ा हुआ खराब कोलेस्ट्रॉल, यानी LDL माना जा रहा है.
कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि भारतीयों में हार्ट से जुड़ी समस्याएं कम कोलेस्ट्रॉल स्तर पर ही शुरू हो सकती हैं. यानी जो कोलेस्ट्रॉल लेवल पश्चिमी देशों में मीडियम माना जाता है, वही भारत में खतरनाक साबित हो सकता है.
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
एक्सपर्ट के अनुसार, इसके पीछे भारतीयों की जेनेटिक बनावट भी एक अहम कारण है. शरीर की संरचना, फैट और शुगर को प्रोसेस करने का तरीका और कुछ विरासत में मिले गुण भारतीयों को कम उम्र में ही हार्ट डिजीज के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना देते हैं. यानी यह समस्या सिर्फ खान-पान तक सीमित नहीं है, बल्कि जीन भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं. इन्हीं जनेटिक कारणों की वजह से कई भारतीयों के आर्टरीज में ब्लॉकेज और दिल से जुड़ी बीमारियां पश्चिमी देशों के लोगों की तुलना में करीब 10 साल पहले ही विकसित हो जाती हैं.
लाइफस्टाइल भी होती है जिम्मेदार
हालांकि, खराब कोलेस्ट्रॉल के लिए सिर्फ जेनेटिक्स को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. लाइफस्टाइल भी इस जोखिम को और बढ़ा देता है. आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जंक फूड, मीठे स्नैक्स और ज्यादा फैट वाला खाना आम हो गया है. इसके साथ ही शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता तनाव और वजन बढ़ना भी दिल की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. ये सभी कारण न सिर्फ एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं, बल्कि एचडीएल यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल को भी कम कर देते हैं. जबकि एचडीएल का काम आर्टरीज में जमा फैट को साफ करने में मदद करना होता है. जब खराब कोलेस्ट्रॉल ज्यादा और अच्छा कोलेस्ट्रॉल कम हो जाता है, तो हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
नहीं दिखते हैं लक्षण
कोलेस्ट्रॉल की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इसके लक्षण अक्सर सामने नहीं आते. ज्यादातर लोगों को तब तक पता नहीं चलता कि उन्हें हाई कोलेस्ट्रॉल है, जब तक सीने में दर्द, सांस फूलने जैसी समस्या या हार्ट अटैक नहीं हो जाता. यही वजह है कि नियमित हेल्थ चेक-अप बेहद जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी उम्र 30 साल से ज्यादा है या जिनके परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास रहा है.
इन चीजों से कर सकते हैं बचाव
हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए रोजमर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. संतुलित और दिल-दोस्त आहार अपनाएं, जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन शामिल हों. रोजाना थोड़ी-बहुत शारीरिक गतिविधि करें, चाहे वह 30 मिनट की वॉक ही क्यों न हो. प्रोसेस्ड फूड और मीठे पेय पदार्थों से दूरी बनाएं, वजन को कंट्रोल में रखें और तनाव को मैनेज करने की कोशिश करें. समय के साथ ये आदतें खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करती हैं, जिससे हार्ट की बीमारी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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