Republic Day 2026: 26 जनवरी 2026 को भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा और हर साल की तरह राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा. हर राष्ट्र का अपना विशेष ध्वज होता है. भारत के राष्ट्रीय ध्वज को हम तिरंगा कहते हैं, जो ज्योतिष और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी जीवंत प्रतीक है.
तिरंगे में समाहित है ग्रहों की अद्भुत शक्ति
केसरिया, सफेद, हरा और बीच में नीले रंग का अशोक चक्र ग्रहों की अद्भुत शक्ति में समाहित है, जो राष्ट के आत्मबल, धैर्य और चेतना को सदैव जागृत रखती है. यही कारण है कि आपदा से लेकर युद्ध और संकट की घड़ी में भी भारत का आत्मबल हमेशा मजबूत रहता है. ज्योतिष शास्त्र में तिरंगे के रंगों को ग्रहों से जोड़कर देखा जाता है, जो सामूहिक चेतना और राष्ट्रीय ऊर्जा का संतुलन बनाए रखते हैं. आइए जानते हैं भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के रंगों में जुड़े ज्योतिषीय और आध्यात्मिक अर्थ को.
केसरिया रंग- तिरंगे के सबसे ऊपर केसरिया रंग त्याग, साहस और तपस्या का प्रतीक है. ज्योतिष में यह रंग सूर्य और मंगल से जुड़ा माना जाता है. सूर्य आत्मा, नेतृत्व, आत्मसम्मान और राष्ट्र की चेतना को दर्शाता है, जबकि मंगल पराक्रम, रक्षा, साहस और वीरता को. साथ ही केसरिया रंग भारत की राजनैतिक, सैन्य और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है.
सफेद रंग- तिरंगे का मध्य में रंग सफेद शांति, सत्य और संतुलन का संकेत देता है. ज्योतिषीय दृष्टि से यह चंद्रमा से जुड़ा है, जोकि मन भावनाएं और संदेवनशीलता का प्रतीक है. सफेद रंग यह दर्शाता है कि भारत केवल शक्ति के साथ ही विवेक के साथ आगे बढ़ने वाला राष्ट्र है.
हरा रंग- तिरंगा झंडे में सबसे नीचे हरा रंग है, जोकि विकास, समृद्धि और जीवन का प्रतीक है, ज्योतिष में बुध को बुद्धि, व्यापार, संवाद और विज्ञान का कारक कहा जाता है. भारत की कृषि, अर्थव्यवस्था, तकनीक और सांस्कृतिक वैभव इसी ऊर्जा से फलता-फूलता है. हरा रंग संकेत देता है कि भारत नवाचार और प्रगति की राह पर निरंतर अग्रसर है.
अशोक चक्र- तिरंगे के मध्य में नीले रंग की 24 तीलियों वाला अशोक चक्र कर्म और धर्म को दर्शाता है. ज्योतिष में इसे शनि ग्रह से जोड़ा जाता है. शनि जोकि न्याय, कर्मफल, अनुशासन और दीर्घकालिक स्थिरता का प्रतीक है. अशोक चक्र यह संदेश देता है कि भारत की शक्ति कर्म, धर्म, नियम और न्याय पर आधारित है.
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