Rare Earth Stocks: रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए सरकार खर्च करेगी ₹72 अरब, इन तीन कंपनियों को मिल सकता है फायदा – rare earth minerals india government to spend 72 billion rupees ev clean energy push three stocks that may benefit

Rare Earth Stocks: भारत में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और क्लीन एनर्जी सेक्टर है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारत में 19.6 लाख EV रजिस्टर हुए। यह एक साल पहले के मुकाबले 17% ज्यादा हैं।

EV मोटर्स, बैटरी सिस्टम और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में रेयर अर्थ मैटीरियल्स का अहम रोल होता है। वहीं, विंड टर्बाइन जैसे रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में हाई परफॉर्मेंस मैग्नेट्स की जरूरत होती है, जो रेयर अर्थ पर ही निर्भर हैं।

आइए जानते हैं कि सरकार रेयर अर्थ मिनरल्स पर फोकस क्यों बढ़ा रही है और इन सेक्टर से कौन सी तीन कंपनियां जुड़ी हुई हैं।

72.8 अरब रुपये का प्रोग्राम

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने 72.8 अरब रुपये का रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम मंजूर किया है। इसका मकसद उन क्रिटिकल एलिमेंट्स के लिए आयात पर निर्भरता कम करना है, जिनका इस्तेमाल EV, एयरोस्पेस, डिफेंस और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर्स में होता है। पॉलिसी लेवल पर यह साफ संकेत है कि भारत इस सेक्टर को रणनीतिक तौर पर मजबूत करना चाहता है।

इसी वजह से रेयर अर्थ से जुड़े या उससे जुड़े अवसर तलाश रही कंपनियों के स्टॉक्स निवेशकों के रडार पर आने लगे हैं। फिलहाल भारत में कोई भी लिस्टेड कंपनी ऐसी नहीं है जो सिर्फ रेयर अर्थ पर फोकस करती हो। लेकिन, कुछ कंपनियों इस सेक्टर से जुड़ी हैं।

  1. Owais Metal and Mineral Processing

Owais Metal and Mineral Processing मेटल्स और मिनरल्स के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी मैंगनीज ऑक्साइड, फेरो मैंगनीज, वुड चारकोल, क्वार्ट्ज स्लैब्स और स्लैग से रेयर अर्थ मिनरल्स की रीसाइक्लिंग जैसे काम में शामिल है। इसके लिए कंपनी अपनी प्रोप्राइटरी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती है। यहां से निकलने वाले रेयर अर्थ प्रोडक्ट्स इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और कैपेसिटर इंडस्ट्री में इस्तेमाल होते हैं।

Owais Metal का स्टॉक शुक्रवार, 24 जनवरी को 4.94% की गिरावट के साथ 248.25 रुपये पर बंद हुआ। जो अपने 52 हफ्ते के हाई से करीब 73% नीचे है। कंपनी ने फरवरी 2024 में 87 रुपये के इश्यू प्राइस पर IPO लॉन्च किया था। इस स्टॉक का 52 हफ्ते का हाई 942.2 रुपये और 52 हफ्ते का लो 200.10 रुपये रहा है।

सरकारी कंपनी NLC India की मुख्य ताकत लिग्नाइट माइनिंग और उससे जुड़ी थर्मल पावर जेनरेशन है। कंपनी तमिलनाडु के नेवेली और राजस्थान के बरसिंगसर में बड़े लिग्नाइट माइंस और पिट-हेड पावर प्लांट्स चलाती है।

PTI की रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने पश्चिम अफ्रीका के माली में लिथियम ब्लॉक्स और रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो में कॉपर और कोबाल्ट माइंस को लेकर शुरुआती बातचीत शुरू की है। कंपनी के CMD प्रसन्न कुमार मोटुपल्ली के अनुसार, माइन और कोल मंत्रालय ने नवरत्न PSU को साफ तौर पर कहा है कि वह क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और खनन को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाए।

NLC इंडिया का शेयर शुक्रवार को 0.76% की गिरावट के साथ 247 रुपये बंद हुआ था। यह अपने 52 हफ्ते के हाई से करीब 15% नीचे है। इस स्टॉक का 52 हफ्ते का हाई 292.35 रुपये और 52 हफ्ते का लो 185.85 रुपये रहा है।

Eco Recycling एक जानी-मानी ई-वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी है। यह एसेट रिमूवल, इन्वेंट्री कंट्रोल, पैकिंग, रिवर्स लॉजिस्टिक्स, डेटा डिस्ट्रक्शन, एसेट रिकवरी और रीसाइक्लिंग जैसी सेवाएं देती है। कंपनी एक मिनरल रिकवरी फैसिलिटी शुरू करने की तैयारी में है, जो PCB, हार्ड ड्राइव और लिथियम-आयन बैटरियों से मेटल रिकवरी पर फोकस करेगी। इससे कोबाल्ट, निकेल और मैंगनीज जैसे कीमती मेटल्स की घरेलू सप्लाई बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता घटेगी।

आगे चलकर कंपनी प्रेशियस मेटल रिकवरी, IT एसेट डिस्पोजिशन, डेटा डिस्ट्रक्शन, लैंप रीसाइक्लिंग और रिफर्बिशमेंट जैसे वैल्यू-एडेड सेगमेंट्स पर ज्यादा फोकस करने की योजना बना रही है। EPR फ्रेमवर्क के तहत इन क्षेत्रों में भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

Eco Recycling का शेयर 1.96% बढ़कर 455 रुपये बंद क्लोज हुआ था। यह अपने 52 वीक के हाई से करीब 55% नीचे है। इस स्टॉक का 52 हफ्ते का हाई 998 रुपये और 52 हफ्ते का लो 416.20 रुपये रहा है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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