
शेयर बाजार में आई हालिया गिरावट की सबसे ज्यादा मार स्मॉलकैप शेयरों पर पड़ी है। निवेशक यह समझ नहीं पा रहे हैं कि वे इन स्मॉलकैप शेयरों में अपने निवेश या SIP को बनाए रखे या फिर इन्हें बेच दें। अगर स्मॉलकैप वाले म्यूचुअल फंड स्कीमों को देखें तो यह उलझन और भी बढ़ जाती है। एक तरफ आंकड़े कहते हैं कि करीब 90 प्रतिशत स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स ने अपने बेंचमार्क इंडेक्स को बीट किया है। लेकिन दूसरी तरफ सच्चाई ये भी है कि एक भी स्मॉलकैप फंड ने पिछले एक साल में अपने निवेशकों को पॉजिटिव रिटर्न नहीं दिया।
स्मॉलकैप शेयरों में दिसंबर 2024 के बाद से लगातार गिरावट जारी है। BSE SmallCap Index दिसंबर 2024 से अब तक करीब 21 फीसदी टूट चुका है। ये गिरावट अचानक नहीं आई। असल में, ये एक लंबे समय से बनती आ रही कमजोरी का नतीजा है। कोविड के बाद से दो-तीन सालों में स्मॉलकैप शेयरों में जबरदस्त तेजी आई थी। कई शेयरों के दाम उनकी कमाई से कहीं आगे निकल गए। वैल्यूएशन लगातार महंगे होते चले गए, लेकिन ग्राउंड पर कंपनियों की कमाई उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पाई।
इसी बीच ग्लोबल संकेत कमजोर पड़े। अमेरिका और यूरोप से अनिश्चितता बढ़ी, एफआईआई यानी विदेशी निवेशकों ने बिकवाली तेज कर दी, और जैसे ही बाजार में डर बढ़ा, सबसे पहले मुनाफावसूली स्मॉलकैप शेयरों में ही देखने को मिली।
लेकिन इस गिरावट के बीच एक बेहद अहम और दिलचस्प बात सामने आई। जहां बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स इस दौरान 21 प्रतिशत गिरा, वहीं करीब 90 प्रतिशत स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स का प्रदर्शन इससे बेहतर रहा। यानी इनमें गिरावट तो आई, लेकिन यह बेंचमार्क इंडेक्स की 21 प्रतिशत की गिरावट से कम रही।
एग्जाम्पल के तौर पर, क्वांट स्मॉलकैप फंड ने पिछले एक साल में -1.65% का रिटर्न दिया है। यानी अगर किसी निवेशक ने इसमें एक साल पहले ₹1,000 लगाए होते, तो आज उसकी वैल्यू करीब 982 रुपये होती। ऐसे समय में, जब बाजार लगातार नीचे जा रहा है, तो ये प्रदर्शन भी किसी उपलब्धि से कम नहीं माना जा सकता।
इसी तरह, TRUSTMF Small Cap Fund और Sundaram Small Cap Fund, इन दोनों फंड्स ने भी गिरावट को करीब 6 प्रतिशत तक सीमित रखा। बड़ी कंपनियों की स्कीमों की बात करें, ICICI Prudential, HDFC और Axis Small Cap Fund में 7 से 8 प्रतिशत के बीच गिरावट देखने को मिली। लेकिन कुछ फंड्स ऐसे भी रहे, जहां गिरावट 15 से 20 प्रतिशत तक पहुंच गई। इनमें JM, Kotak, Tata, HSBC और LIC MF के स्मॉलकैप फंड्स शामिल रहे।
अब यहां एक बहुत जरूरी बात समझनी होगी। इंडेक्स को बीट करना और पैसा कमाना, दो अलग चीजें हैं। निवेशक यह सोचकर राहत जरूर महसूस कर सकते हैं कि उनके फंड्स ने इंडेक्स से बेहतर किया, लेकिन सच्चाई यह भी है कि किसी भी स्मॉलकैप फंड ने इस अवधि में पॉजिटिव रिटर्न नहीं दिया।
मार्केट एक्सपर्ट्स पिछले दो साल से लगातार चेतावनी दे रहे थे कि स्मॉलकैप शेयरों का वैल्यूएशन बहुत ज्यादा ऊंचा हो गया है। और ऐसे माहौल में स्टॉक-स्पेसिफिक स्ट्रैटेजी ही काम आ सकती है। ये आंकड़े यही साबित करते हैं।
सबसे चिंता की बात ये हैं कि एक्सपर्ट्स के मुताबिक, स्मॉलकैप शेयरों में ऊंचे वैल्यूएशन की समस्या अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। तेज गिरावट के बावजूद बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स का पी/ई रेशियो करीब 24 पर बना हुआ है। कई बड़े स्मॉलकैप फंड्स का पोर्टफोलियो पी/ई तो इससे भी ऊंचे स्तर पर हैं।
एग्जाम्पल के तौर पर, Axis Small Cap Fund का पोर्टफोलियो P/E करीब 49, ICICI Prudential का करीब 34, HDFC Small Cap का करीब 36 और कुछ फंड्स तो 50 से ऊपर के P/E पर बैठे हैं। ऊंचा P/E यह बताता है कि मार्केट को आगे बहुत तेज ग्रोथ की उम्मीद है। लेकिन अगर कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ी, तो इनमें गिरावट का जोखिम भी अधिक रहता है। इनकी तुलना में कम वैल्यूएशन वाले फंड्स कुछ हद तक नीचे की ओर सुरक्षा दे सकते हैं, लेकिन तेजी के दौर में वे पीछे भी रह सकते हैं।
अब बात करते हैं एक्सपर्ट्स की। फंड मैनेजर्स का साफ कहना है कि स्मॉलकैप सेगमेंट हमेशा से हाई रिस्क, हाई रिटर्न वाली कैटेगरी रही है। लंबी अवधि में स्मॉलकैप सेगमेंट का प्रदर्शन मिडकैप और लार्जकैप से बेहतर रह सकता हैं। पुराने आंकड़ें देखें तो स्मॉलकैप फंड्स का औसत रिटर्न 18 से 20% CAGR के आसपास रहा है। लेकिन 2020 से 2024 के बीच जो जबरदस्त उछाल आया, वह एक एक्सेप्शनल फेज था। अब बाजार धीरे-धीरे अपने नॉर्मल रिटर्न साइकल की ओर लौट रहा है।
निवेशकों के लिए सबक
फाइनेंशियल एडवाइजर्स इस वक्त एक ही बात पर जोर दे रहे हैं। डिसिप्लिन और एसेट एलोकेशन। स्क्रिपबॉक्स के मैनेजिंग पार्टनर सचिन जैन का मानना है कि अधिकतर निवेशकों के लिए लार्जकैप शेयर ही पोर्टफोलियो की रीढ़ होने चाहिए। उनके मुताबिक स्मॉल और मिडकैप में निवेश केवल आक्रामक निवेशकों तक सीमित रहना चाहिए। जैन कहते हैं कि निवेशकों का म्यूचुअल फंड्स में निवेश तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ-साथ उनमें निवेश का अनुशासन नहीं आया है। उनका कहना है कि “कई निवेशक अब भी पिछले सालों के रिटर्न को देखकर फैसले ले रहे हैं, न कि किसी प्लानिंग के आधार पर।”
उनका कहना है कि स्मॉलकैप फंड्स में निवेश उन निवेशकों के लिए सही हैं जिनका नजरिया 5 से 7 साल का हो और जिनमें जोखिम उठाने की क्षमता ज्यादा हो। उनका कहना है कि अगर आप अभी स्मॉलकैप में पैसा डालना चाहते हैं तो एकमुश्त निवेश से बचिए। इसकी जगह SIP या STP जैसे तरीकों से धीरे-धीरे एंट्री लेना बेहतर कदम होगा।
आनंद राठी वेल्थ की श्वेता राजानी का कहना है कि स्मॉलकैप सेगमेंट को अब भी लंबे समय में बेहतर रिटर्न के साधन के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इस वक्त यह सेगमेंट री-प्राइसिंग फेज से गुजर रहा है। श्वेता राजानी कहना ही कि स्मॉलकैप शेयरों में 20 से 25 प्रतिशत तक की गिरावटें पहले भी कई बार आई हैं और ज्यादातर बार इंडेक्स अगले 18 से 24 महीनों के भीतरी पूरी रिकवरी कर लेता है। यानी जो निवेशक धैर्य रख सकते हैं, और जिनके पास लंबा समय है, उनके लिए यहां धीरे-धीरे मौके बन सकते हैं।
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