
इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) ने कहा है कि उसकी माइक्रोफाइनेंस सब्सिडियरी, भारत फाइनेंशियल इन्क्लूजन लिमिटेड (BFIL) से जुड़े जिन मामलों की समीक्षा की जा रही है, उनसे बैंक पर कोई अतिरिक्त वित्तीय असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, BFIL के स्टैच्यूटरी ऑडिटर ने 31 दिसंबर 2025 को खत्म हुई तिमाही और नौ महीनों की अवधि के लिए जारी अपनी लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट में अब भी अपने क्वालिफाइड कन्क्लूजन को जांच पूरी होने तक बरकरार रखा है।
इंडसइंड बैंक ने शुक्रवार 23 जनवरी को अपने मौजूदा वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही के नतीजों को जारी किया। इस दौरान बैंक ने बताया कि उसने BFIL से जुड़े मामलों की फिर से जांच की है। मैनेजमेंट के मुताबिक, ये मुद्दे पहले ही पिछली तिमाही में बताए जा चुके थे और नई जांच के बाद भी बैंक का आकलन बदला नहीं है। बैंक ने कहा, “जैसा कि पिछली तिमाही में आकलन किया गया था, उसी के अनुरूप आगे भी कोई अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव होने की संभावना नहीं है।”
हालांकि, BFIL के स्टैच्यूटरी ऑडिटर ने 21 जनवरी 2026 की अपनी लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट में अब भी क्वालिफाइड निष्कर्ष बनाए रखा है। ऑडिटर का कहना है कि सहायक कंपनी की कुछ प्रक्रियाएं अभी पूरी तरह बंद नहीं हुई हैं। मैनेजमेंट ने कहा, “यह क्वालिफिकेशन पिछली तिमाही में भी था। यह बैंक के वित्तीय नतीजों की क्वालिफिकेशन नहीं है, बल्कि सब्सिडियरी कंपनी के फाइनेंशियल आंकड़ों से जुड़ा है और कुछ पिछले सालों की घटनाओं से संबंधित है।”
नतीजों के बाद हुई इन्वेस्टर कॉल में इंडसइंड बैंक के मैनेजमेंट ने निवेशकों को साफ किया कि यह ऑडिट क्वालिफिकेशन कोई नया मामला नहीं है और इसका इंडसइंड बैंक के स्टैंडअलोन या कंसॉलिडेटेड वित्तीय नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ता। मैनेजमेंट ने कहा, “यह मामला पिछली तिमाही में भी मौजूद था। यह बैंक के वित्तीय नतीजों पर कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि सहायक कंपनी (सब्सिडियरी) के खातों से जुड़ा हुआ है और इसका संबंध पिछले वर्षों की कुछ घटनाओं से है।”
उन्होंने आगे बताया कि इन मामलों से जुड़ा वित्तीय असर पिछले सालों में पूरी तरह प्रोविजंस के जरिए कवर किया जा चुका है। मौजूदा जांच का फोकस मुख्य रूप से स्टाफ की जवाबदेही तय करने और जांच प्रक्रिया को औपचारिक रूप से बंद करने पर है, न कि किसी नई वित्तीय हानि की पहचान पर। मैनेजमेंट ने दोहराया, “जो प्रक्रिया चल रही है, वह स्टाफ अकाउंटेबिलिटी और यह देखने के लिए है कि कहीं कोई पहलू खुला तो नहीं रह गया। इससे कोई नया वित्तीय असर नहीं पड़ेगा।”
बैंक के मैनेजमेंट ने ऑडिटर की टिप्पणी को नेगेटिव नहीं, बल्कि प्रोसीरजल बताया है। उन्होंने कहा कि ऑडिटर ने यह साफ किया है कि जांच पूरी होने तक वे यह तय नहीं कर सकते कि किसी और पहलू की जांच की जरूरत है या नहीं। एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने बताया, “यह सिर्फ एक क्वालिफाइड रिपोर्ट है, जिसमें यह बताया गया है कि जांच पूरी होने तक यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई और मामला देखने लायक है या नहीं। लेकिन सभी वित्तीय प्रभाव पहले ही कवर किए जा चुके हैं।”
जब यह पूछा गया कि क्या मामला जमीनी स्तर पर हुए पुराने फ्रॉड या डिफॉल्ट से संबंधित है, तो मैनेजमेंट ने हां में जवाब देते हुए दोहराया कि ऐसे सभी मामले पहले ही पहचाने और अकाउंट किए जा चुके हैं। बैंक ने अंत में जोर देकर कहा कि BFIL पर जारी क्वालिफिकेशन का IndusInd Bank के स्टैंडअलोन हों या कंसोलिडेटेड बुक्स पर कोई वित्तीय असर पड़ेगा।
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