बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन ने भारत के साथ संबंधों पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने BBC को दिए इंटरव्यू में कहा कि बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्ते बिगाड़ने वाला कोई कदम नहीं उठाया है. उन्होंने भारत से पूछा कि ‘हमने ऐसा क्या किया जिससे रिश्ते बिगड़ गए?’ तौहीद ने कहा कि दिल्ली में उनके समकक्षों से पूछा जा सकता है कि बांग्लादेश की तरफ से कोई सख्त कदम उठाया गया है या नहीं.
भारतीयों की असुरक्षा का सबूत नहीं: तौहीद
तौहीद हुसैन का इंटरव्यू ऐसे समय में आया है जब भारत-बांग्लादेश के रिश्ते तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं. मोहम्मद यूनुस अगस्त 2024 में सत्ता में आए थे और अब 12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश में संसदीय चुनाव होने वाले हैं. तौहीद हुसैन ने भारत के उस फैसले पर नाराजगी जताई, जिसमें भारत ने ढाका से अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया. उन्होंने कहा, ‘इसका कोई सबूत नहीं है कि हम भारतीयों की सुरक्षा नहीं कर पाए. ऐसे में दिल्ली का यह फैसला हमें अच्छा नहीं लगता.’
भारत अपने अल्पसंख्यकों पर ध्यान दे: तौहीद
हिंदुओं की सुरक्षा और हाल के हमलों पर भारत की चिंता पर तौहीद हुसैन ने उल्टा जवाब दिया. उन्होंने कहा, ‘हम भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाइयों पर बयान नहीं देते हैं. उम्मीद करता हूं कि भारतीय अधिकारी भी यही नीति अपनाएं. हमारे नागरिकों के खिलाफ ज्यादती होगी तो हमारे पास उससे निपटने का तंत्र है. भारत अपने अल्पसंख्यकों का ध्यान रखे तो ज्यादा अच्छा है. हम अपना काम खुद कर लेंगे.’
भारत-बांग्लादेश को मिलकर काम करना होगा: तौहीद
रिश्तों की स्थिति पर उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर हैं या नहीं, लेकिन मुझे लगता है कि बांग्लादेश और भारत के रिश्ते दोनों देशों के लिए बहुत अहम हैं. दोनों को ही बेहतर बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए.’ उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी उम्मीद थी कि वे ऐसे बयान देने से बचेंगी जो बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति से मेल नहीं खाते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
पाकिस्तान से बांग्लादेश के बढ़ते संबंधों पर तौहीद हुसैन ने कहा कि पिछले शासन (शेख हसीना के समय) में पाकिस्तान के साथ रिश्ते जानबूझकर बिगाड़े गए थे. अब कुछ मुद्दों पर बात हो रही है और सामान्य रिश्ता बनाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा, ‘किसी देश से बेहतर रिश्ते चाहने में क्या गलत है? हम एक पड़ोसी देश के नाते उनसे सामान्य रिश्ता चाहते हैं, जैसे बाकी देशों से चाहते हैं.’
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