Basant Panchmi 2026: ब्रज में ठाकुर जी के मोजे क्यों उतरते हैं ठंड में? कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने सुनाया मजेदार किस्सा!

Basant Panchmi 2026: वसंत पंचमी का दिन ब्रज परंपरा में बेहद खास माना जाता है. मां सरस्वती की पूजा के साथ ठाकुर जी की सेवा-पद्धति में भी इस दिन से बड़ा बदलाव देखने को मिलता है.

इसी दिन से ठाकुर जी को शीत ऋतु के भारी वस्त्रों की जगह वसंत ऋतु के हल्के और पीले रंग के वस्त्र पहनाए जाते हैं. यही कारण है कि, वसंत पंचमी के दिन ही ठाकुर जी के ऊनी मोजे भी उतार दिए जाते हैं.

ब्रज परंपरा में भक्ति का महत्व

सामान्य नजरिए से देखा जाए तो जनवरी के महीने में ठंड अपने चरम पर होती है, कोहरा पड़ने के साथ तापमान भी काफी कम रहता है. ऐसे में ठाकुर जी के मोजे उतारना तर्क के लिहाज से अजीब लग सकता है, लेकिन ब्रज भक्ति परंपरा तर्क से नहीं, भाव को मानती है.

ब्रज में ठाकुर जी को मूर्ति नहीं, बल्कि सजीव बालक और प्रियतम के रूप में पूजा जाता है.

कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने सुनाई इससे जुड़ा किस्सा

वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय महाराज ने इसी परंपरा से जुड़ा एक भक्तिपूर्ण किस्सा सुनाया है. उन्होंने कहा कि, एक बार किसी आचार्य चरण से मिलना हुआ तो मैंने पूछा कि वसंत पंचमी पर इतनी ठंड के बावजूद ठाकुर जी के मोजे क्यों उतार दिए जाते हैं.

इस पर आचार्य ने उत्तर देते हुए कहा कि, ‘मोजे इसलिए उतारे जाते हैं ताकि ठाकुर जी के पैरों में ठंड लगे और वसंत ऋतु से कहें कि, जल्दी आओ हमें ठंड लग रही है, हमारे मोजे इन लोगों ने उतार दिए हैं’. 

ब्रज में आज से होली की तैयारियां शुरू

इस भाव के पीछे एक गहरी भक्ति छिपी हुई है. यहां ऋतु परिवर्तन को कैलेंडर से नहीं, बल्कि ठाकुर जी की अनुभूति से जोड़कर देखा जाता है. मान्यताओं के मुताबिक, जैसे ही वसंत पंचमी आती है, ब्रज में होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. इस दौरान ठाकुर जी का पीले वस्त्र, हल्का सा श्रृंगार और सर्दी के कपड़ों की जगह हल्के कपड़े पहनाए जाते हैं. 

असल में यह परंपरा ब्रज में भक्त और भगवान के बीच आत्मीय संबंध को दर्शाती है, जहां ठाकुर जी किसी दूर के ईश्वर नहीं, बल्कि घर के सदस्य की तरह रहते हैं. उनके लिए ऋतु बदली जाती है, कपड़े बदले जाते हैं और भाव भी बदला जाता है.यही ब्रज की भक्ति परंपरा का असली महत्व है. 

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