Share Markets: 4 महीने के निचले स्तर पर शेयर बाजार, क्या बजट से पहले आएगी तेजी? जानें एक्सपर्ट्स की राय – will share markets rebound from 4 month low ahead of budget 2026 here is what analysts say

शेयर बाजार की गिरावट बढ़ती ही जा रही है। आज 21 जनवरी को लगातार तीसरे दिन बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी अब अपने 4 महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है। क्या 1 फरवरी के बजट से पहले शेयर बाजार में तेजी लौटगी या गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा? आखिर शेयर बाजार क्यों दबाव में है? इसके सपोर्ट लेवल कितने मजबूत हैं और एक्सपर्ट्स बजट से पहले निवेशकों को क्या सलाह दे रहे हैं?

शेयर बाजार ने आज भारी उतार-चढ़ाव देखा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय पर 1,056 अंकों तक टूट गया और निफ्टी ने 25,000 के साइकोलॉजिकल लेवल को तोड़ दिया था। लेकिन बाद में निचले स्तरों पर खरीदारी होने से बाजार ने अपने ज्यादातर नुकसान की भरपाई कर ली। इसके बावजूद अंत में सेंसेक्स करीब 270 अंक नीचे बंद हुआ और निफ्टी भी कमजोरी के साथ 25,157 के आसपास क्लोज हुआ। यानी साफ है कि निचले स्तरों पर खरीदारी तो आई, लेकिन निवेशकों का सेंटीमेंट अभी भी कमजोर बना हुआ है।

आखिर शेयर बाजार के इस डर की असली वजह क्या है?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार की सबसे बड़ी चिंता इस वक्त तीन मोर्चों पर है। पहला है ग्लोबल टेंशन। अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी और नए टैरिफ की आशंकाओं ने ग्लोबल बाजारों में “रिस्क-से दूर रहने” का माहौल बना दिया है, जिससे निवेशक शेयर बाजार से दूर हो रहे हैं।

दूसरी चिंता है कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की बिकवाली लंबे समय से रुकने का नाम नहीं ले रही है। इसने भारतीय बाजार की चाल को और कमजोर किया है। साल की शुरुआत से ही अब तक विदेशी निवेशक 32,000 करोड़ रुपये से अधिक भारतीय बाजार से निकाल चुके है। रुपया भी लगातार कमजोर हो रहा है और डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब है। ऐसे में विदेशी निवेशक जोखिम से दूरी बनाए हुए हैं।

तीसरी चिंता है कमजोर अर्निंग्स सीजन। कमाई के मोर्चे पर भी अभी तक कोई ऐसा बड़ा पॉजिटिव सरप्राइज नहीं मिला है, जो बाजार को मजबूती दे सके। IT, रियल्टी और कुछ कंज्यूमर सेगमेंट्स में नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे हैं, जिससे निवेशकों पहले से और अधिक सतर्क हो गए हैं।

क्या बजट से पहले बाजार में दिखेगी तेजी?

स्वास्तिक इनवेस्टमेंट के रिसर्च हेड संतोष मीणा मानते हैं कि बजट से पहले आई यह गिरावट निवेशकों को डराने से ज्यादा उन्हें वैल्यू तलाशने पर मजबूर कर रहा है। उनके मुताबिक, मौजूदा माहौल में आक्रामक दांव लगाने के बजाय संतुलित और रक्षात्मक रणनीति ज्यादा कारगर साबित हो सकती है।

उनका मानना है कि बड़े प्राइवेट बैंकों के शेयर अब ऐसे स्तरों पर आ गए हैं, जहां वैल्यूएशन ऐतिहासिक औसत के मुकाबले ज्यादा आकर्षक दिखने लगे हैं। HDFC Bank, Kotak Mahindra Bank और Federal Bank जैसे नामों में लंबी अवधि के निवेशकों को धीरे-धीरे मौके मिल सकते हैं।

इसके साथ ही, वे चुनिंदा PSU शेयरों को भी नजरअंदाज नहीं करने की सलाह देते हैं। संतोष मीणा का मानना है कि ONGC, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और Hindustan Copper जैसे स्टॉक्स में स्ट्रक्चरल कहानी अभी भी मजबूत बनी हुई है। इसके अलावा FMCG सेक्टर को वे पोर्टफोलियो का “सुरक्षा कवच” मानते हैं, जो उतार-चढ़ाव वाले समय में भी स्थिर कमाई और भरोसा दे सकता है।

शेयर बाजार की चाल को पर संतोष मीणा का कहना है निफ्टी के लिए टेक्निकल नजरिए से 25,000 का स्तर इस वक्त बेहद अहम बन गया है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि निफ्टी का 200-दिनों का मूविंग एवरेज भी इसी के आसपास है।

मीणा का कहना है कि अगर निफ्टी इस स्तर के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहता है, तो बजट से पहले एक टेक्निकल रिकवरी या राहत भरी तेजी देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर यह सपोर्ट लेवल निर्णायक रूप सेटूट जाता है, तो गिरावट 24,900 या उससे नीचे तक खिंच सकती है। यानी अगले कुछ दिन बाजार की दिशा तय करने में बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

हालांकि सभी एक्सपर्ट्स इतनी उम्मीद में नहीं हैं। SBI Securities के फंडामेंटल रिसर्च हेड सनी अग्रवाल का कहना है कि बजट से पहले बाजार की रिकवरी का अनुमान लगाना फिलहाल बेहद मुश्किल है, क्योंकि इस समय बाजार को घरेलू फैक्टर्स से ज्यादा ग्लोबल घटनाएं चला रही हैं। उनका कहना है कि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये की कमजोरी और गोल्ड-सिल्वर जैसी सेफ हेवन एसेट्स में तेज उछाल यह संकेत दे रहा है कि निवेशक अभी जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं। ऐसे में अगर बाजार में कोई उछाल भी आता है, तो वह सीमित और कमजोर रह सकता है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजित मिश्रा भी इसी तरह का नजरिया रखते हैं। उनका कहना है कि निफ्टी के 200-दिनों के एवरेज से नीचे फिसलने के बाद बाजार की स्थिति तकनीकी रूप से कमजोर हुई है। अगर दबाव बना रहता है, तो निफ्टी 24,900 के स्तर को भी टेस्ट कर सकता है। हालांकि, ग्लोबल मोर्चे पर अगर तनाव थोड़ा भी कम होता बै, तो एक शॉर्ट टर्म राहत भरी रैली देखने को जरूर मिल सकती है।

कुल मिलाकर यह समय एकमुश्त बड़ा दांव लगाने का नहीं, बल्कि SIP और चरणबद्ध तरीके से निवेश का है। अगर निफ्टी 25,000 के ऊपर टिका रहता है, तो बाजार राहत की सांस ले सकता है। लेकिन तब तक सावधानी, संतुलन और धैर्य ही निवेशकों के सबसे बड़े हथियार बने रहेंगे।

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