
गुड़गांव की एक हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्म (एचएफटी) इंडिया में कैश मार्केट के सबसे दमदार खिलाड़ियों में से एक बन गई है। इस फर्म का नाम ग्रेविटॉन रिसर्च है, जिसने 2025 में 1.6 लाख करोड़ रुपये के कम से कम 1,900 इंट्राडे ट्रेड्स किए हैं। मनीकंट्रोल के एनालिसिस से यह जानकारी मिली है। औसत ट्रेड करीब 85 करोड़ रुपये का है। 1,900 बल्क डील्स में से 458 डील्स 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के हैं।
2014 में हुई थी ग्रेविटॉन रिसर्च की शुरुआत
अंकित गुप्ता और निशिल गुप्ता ने 2014 में Graviton Research की शुरुआत की थी। दोनों इंजीनियर्स हैं, जिन्होंने आईआईटी से पढ़ाई की है। यह एक प्राइवेट फंडेड रिसर्च फर्म है। कंपनी खुद को ‘प्रॉपरायटरी क्वांटिटेटिव ट्रेडिंग फर्म’ बताती है। इसका मतलब है कि यह ट्रेडिंग के लिए अपने पैसे का इस्तेमाल करती है। इस फर्म का फोकस मिड और स्मॉलकैप स्टॉक्स पर रहा है। लार्जकैप स्टॉक्स में इसकी काफी कम दिलचस्पी है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि इस एप्रोच के मिलेजुले नतीजे हैं।
90 फीसदी ट्रांजेक्शन में मुनाफा कमाने का रिकॉर्ड
ग्रेविटॉन रिसर्च का सक्सेस रेट और प्रॉफिट कमाने का ट्रैक रिकॉर्ड जबर्दस्त है। इसने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के 458 ट्रेड्स में से 90 फीसदी ट्रांजेक्शन में मुनाफा कमाया। इसके मुकाबले रिटेल इनवेस्टर्स का सक्सेस रेट्स 30-50 फीसदी के बीच होता है। हालांकि, इन ट्रेड्स से कंपनी का प्रॉफिट सिर्फ 24 करोड़ रुपये रहा। मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि अगर अगर यह फर्म इंडिया के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस मार्केट में एक्टिव है तो उसका एक्चु्अल प्रॉफिट्स काफी ज्यादा हो सकता है।
रेगुलेटर्स के रडार पर रही है यह कंपनी
ग्रेविटॉन रिसर्च के ट्रेड्स पर रेगुलेटर्स के रडार पर आ चुके हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अक्तूबर में फर्म के ऑफिसेज पर छापा मारा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्म का दावा है कि वह सभी नियम और कानूनों का पालन करती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्म का प्रॉफिट FY25 में 67 फीसदी बढ़ा। इससे कंपनी का नेट प्रॉफिट 1,010 करोड़ पहुंच गया। मनीकंट्रोल ने 9 सितंबर को बताया था कि जेन स्ट्रीट के साथ ग्रेविटॉन उन 10 मार्केट ट्रेडर्स में शामिल था, जिन पर सेबी की करीबी नजरें थीं। हालांकि, सेबी ने अब तक कोई औपचारिक जांच शुरू नहीं की है।
एल्गोरिद्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल
मनीकंट्रोल अभी यह पता नहीं लगा सका है कि यह फर्म क्लाइंट्स के पैसे का इस्तेमाल ट्रेडिंग के लिए करती है या नहीं। मार्केट की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि ग्रेविटॉन मार्केट की चाल का अंदाजा लगाने के लिए एल्गोरिद्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल करती है। ग्रेविटॉन जैसी फर्मों की बढ़ती मौजूदगी छोटे रिटेल ट्रेडर्स के लिए चिंता की बात है। इसकी वजह यह है कि कई इंट्राडे डेरिवेटिव ट्रेड्स में ये रिटेल इनवेस्टर्स के काउंटरपार्टी होते हैं।
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