जापान के खिलाफ चीन की मदद के लिए मैदान में उतरा रूस, इंडो-पैसिफिक में टेंशन जबरदस्त

ईस्ट चाइना सी में चीन और जापान में चल रहे भयंकर तनाव के बीच रूस की एंट्री से हालात बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं. रूस ने चीन के समर्थन में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने स्ट्रेटेजिक बॉम्बर और लड़ाकू विमानों को उतारकर जापान को कड़ा संदेश देने की कोशिश की है. जापान और दक्षिण कोरिया ने इसे गहरी चिंता का विषय बताया है.

रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, चीन और रूस की वायु सेनाओं ने एशिया-पैसिफिक (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में साझा एयर-पेट्रोलिंग की है. इस पेट्रोलिंग में रूस के टीयू-95 स्ट्रेटेजिक मिसाइल कैरियर (बॉम्बर) ने चीन के एच-6 बॉम्बर्स के साथ ईस्ट चाइना सी, जापानी समंदर और पश्चिमी प्रशांत महासागर में हवाई गश्त की. इस दौरान रूस के सु-30, सु-35 और चीन के जे-16 फाइटर जेट ने इन बॉम्बर्स को कवर दिया.

रूस ने हालांकि, दावा किया कि ये साझा पेट्रोलिंग, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत की गई थी, लेकिन जापान और दक्षिण कोरिया ने कड़ा ऐतराज जताया है. जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि चीन-रूस मिलकर जापान के खिलाफ ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जो चिंता का विषय है.

मंगलवार (9 दिसंबर, 2025) को चीन ने जापानी विमानों को चेतावनी देने का दावा करते हुए एक कॉल का ऑडियो जारी किया, जबकि जापान ने कहा कि चीनी सैन्य अधिकारी हॉटलाइन पर प्रतिक्रिया ही नहीं दी. दोनों देश एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं.

दरअसल, जापान की नई प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने ईस्ट चाइना सी में अपने रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने की घोषणा की है, साथ ही ताइवान पर चीन के हमले के दौरान मदद की घोषणा की है. इस बात से चीन चिढ़ा हुआ है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन और जापान ने वर्चस्व की जंग छेड़ दी है.

मंगलवार के चीन-रूस साझा एयर पेट्रोल पर दक्षिण कोरिया ने आपत्ति दर्ज कराई. साउथ कोरिया की सेना ने कहा है कि उसके एयरस्पेस में चीन और तीसरे देश के लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी है. साउथ कोरिया ने कहा, ’07 रूसी विमान और 02 चीनी विमान उसकी सीमा में घुस आए.’ साउथ कोरिया के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ ने बताया है कि दो चीनी और सात रूसी सैन्य विमान कोरिया एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (KADIG) में दाखिल हो गए थे, जिसके बाद दक्षिण कोरिया ने अपने लड़ाकू विमान भेजे. करीब एक घंटे तक ये विमान हमारे एयरस्पेस में आते-जाते रहे और फिर बाहर निकल गए.

दरअसल, पिछले हफ्ते चीन ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर लियाओनिंग को पहली बार ट्रेनिंग मिशन पर ईस्ट चाइना सी में तैनात किया था. इस दौरान विमानवाहक युद्धपोत से चीन के जे-15 विमानों ने उड़ान भरी थी. ईस्ट चाइना सी पर जापान भी अपना दावा करता आया है और चीनी विमानों पर जापानी एयर-स्पेस उल्लंघन का आरोप लगाया था. जापान ने अमेरिकी फाइटर जेट एफ-15 को स्क्रैम्बल किया था. इस दौरान, दोनों देशों (चीन और जापान) ने एक दूसरे के फाइटर जेट्स पर रडार जाम करने का आरोप लगाया था.

यह भी पढ़ें:-
US Visa: ट्रंप का भारतीयों के खिलाफ बड़ा एक्शन? अमेरिका ने रद्द कर दिए 85,000 वीजा, विदेश विभाग बोला- अब नहीं रुकेंगे…

Read More at www.abplive.com