
भारत की मशहूर महिला कथावाचक नेहा सारस्वत भगवान श्री कृष्ण की परम भक्त हैं. वह सिर्फ कथावाचक ही नहीं हैं; उनके अनमोल विचारों में सकारात्मकता, आत्म-सुधार, और आध्यात्मिक गहराई झलकती है, जो सत्य का मार्ग दिखाने में मदद करती है.

नेहा सारस्वत के अनुसार, “सबसे अच्छा बदला है कुछ नहीं, खुद को सही करो, माफ करो और अपने पथ पर आगे बढ़ो. यह विचार इस बात की पुष्टि करता है कि दूसरों को बदलने की बजाय खुद को बदल दो, माफ करो, और आगे बढ़ो; यही सच्चाई के मार्ग पर चलने का सबसे अच्छा तरीका है.

नेहा सारस्वत कहती हैं कि अगर आप सही हो तो कुछ भी साबित करने की कोशिश मत कीजिए; बस आप सही बने रहिए, एक दिन समय खुद गवाही दे देगा. यह सत्य और सही राह पर टिके रहने के महत्व पर जोर देता है, जिसका परिणाम समय आने पर अपने आप सामने आता है.

जो मिला है, उसकी कद्र करो; नेहा सारस्वत का यह विचार हमें कृतज्ञता सिखाता है. जीवन में जो कुछ भी हमें प्राप्त है, चाहे वह छोटी-मोटी सफलता हो, अच्छे रिश्ते हों, या कोई अवसर हो, हमें उसकी तारीफ करनी चाहिए, क्योंकि कुछ लोगों के पास वह भी नहीं होता.

‘जो नहीं मिला, उसके लिए मेहनत करो’ यह हमें आलस्य से बचाता है और मंजिल तक पहुंचाने के लिए सफल बनाता है. जो चीजें अधूरी हैं, उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करनी चाहिए, क्योंकि बिना मेहनत के इस दुनिया में कुछ भी हासिल नहीं होता है.

नेहा सारस्वत का सबसे फेमस अनमोल विचार है, “मुस्कान भले ही छोटा सा शब्द है, पर यह इंसान की सबसे बड़ी ताकत है, क्योंकि यह तनाव कम करती है, रिश्तों को मजबूत करती है, आत्मविश्वास बढ़ाती है, दूसरों को सकारात्मकता देती है और मुश्किल समय में भी उम्मीद जगाती है; यह एक ‘जादुई’ क्रिया है जो बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कह जाती है.
Published at : 09 Dec 2025 06:40 AM (IST)
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