जबलपुर में साइबर अपराधियों ने एक हैरान कर देने वाला मामला अंजाम दिया, जहां 72 वर्ष के एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को तीन दिनों तक कथित रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 21.5 लाख रुपये ठग लिए गए. पुलिस ने शनिवार (7 दिसंबर) को इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पीड़ित अविनाश चंद्रा नेपियर टाउन के निवासी हैं, जिन्हें एक दिसंबर को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया था.
जानकारी के अनुसार, फोन करने वाले ने खुद को पुणे एटीएस का अधिकारी बताया और कहा कि चंद्रा के बैंक खाते और आधार नंबर का इस्तेमाल आतंकवादियों के वित्तीय नेटवर्क में किया गया है.
एटीएस अधिकारी बताकर किया डिजिटल अरेस्ट
अपराधी ने खुद को एटीएस अधिकारी बताते हुए व्हाट्सएप पर कुछ दस्तावेज भेजे और चंद्रा को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी. उसने कहा कि यदि चंद्रा सहयोग नहीं करेंगे तो उन्हें और उनके बेटे को तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाएगा तथा उनकी संपत्ति जब्त कर दी जाएगी. इस तरह भय पैदा कर ठगों ने अविनाश चंद्रा को अपनी जाल में फंसा लिया.
पुलिस के अनुसार, ठगों ने उन्हें तीन दिनों तक प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक लगातार वीडियो कॉल पर रखा. इस दौरान चंद्रा की हर गतिविधि पर नजर रखी गई और उन्हें किसी से भी बात करने या घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई. इस दौरान पीड़ित मानसिक दबाव में रहा और पूरी तरह से अपराधियों के निर्देशों का पालन करता रहा.
तीन किस्तों में रुपये जमा करने के लिए किया मजबूर
आरोपियों ने बैंक खाते के नंबर भेजकर चंद्रा से तीन अलग-अलग किस्तों में 21.5 लाख रुपये जमा कराने के लिए मजबूर किया. विश्वास दिलाने के लिए उन्होंने कहा कि यह रकम केवल ‘कुछ समय के लिए’ सुरक्षित रखी जा रही है और छह दिनों में वापस कर दी जाएगी, लेकिन यह महज एक छलावा था. ठगों ने डर का माहौल बनाकर पीड़ित से उसकी संपत्ति, बैंक डिटेल्स और अन्य निजी जानकारी भी हासिल कर ली. अपनी बात को भरोसेमंद दिखाने के लिए उन्होंने रक्षा मंत्रालय के नाम पर जाली दस्तावेज भी भेजे.
मामले का खुलासा तब हुआ जब चंद्रा के परिवार को उनकी गतिविधियों पर शक हुआ और वे साइबर पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुंचे. जैसे ही यह जानकारी आरोपियों को लगी, उन्होंने फोन कर कहा कि दी गई रकम अब किसी भी हालत में वापस नहीं की जाएगी.
आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस ने इस घटना को गंभीर साइबर अपराध करार दिया है और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है. यह घटना साइबर ठगी के बढ़ते नए तरीकों के प्रति लोगों को सतर्क करती है और बताती है कि किसी भी अनजान कॉल या धमकी से बचने के लिए तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना बेहद जरूरी है.
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