Kaynes Tech Shares: शेयर दो दिन में 14% धड़ाम, JP मॉर्गन की चेतावनी- ‘अभी नहीं करें खरीदने की जल्दबाजी’ – kaynes technology share price falls 9 percent jpmorgan advises investors to avoid bottom fishing

Kaynes Technology Share Price: केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया के शेयरों में आज 5 दिसंबर को लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली। कंपनी के शेयर कारोबार के दौरान 9 फीसदी तक टूटकर 4,537 रुपये के स्तर पर आ गए। यह इसका पिछले 8 महीनों का सबसे निचला स्तर है। पिछले दो दिनों में कंपनी के शेयर 14% तक टूट चुके हैं। यह गिरावट ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें उसने कंपनी के रिलेटेड-पार्टी डिस्क्लोजर में कई गड़बड़ियों को लेकर चिंता जताई थी।

कोटक की रिपोर्ट के बाद अब ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने भी निवेशकों को सलाह दी है कि फिलहाल वे इस स्टॉक में “बॉटम फिशिंग” यानी गिरते दामों में खरीदारी से बचें। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी जब तक अपने तीसरी तिमाही के नतीजे जारी नहीं करती, तब तक उसे स्टॉक के लिए कोई साफ, मजबूत कैटलिस्ट नहीं दिख रहा है। इसके बैलेंस शीट और कैश फ्लो को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। रेवेन्यू ग्रोथ और एक्स-स्मार्ट मीटर बिजनेस पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

जेपी मॉर्गन ने कहा कि सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद से ही स्टॉक लगातार दबाव में है और यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि स्टॉक कितना नीचे जाकर रुकेगा। ब्रोकरेज ने कहा कि “कंपनी के फंडामेंटल्स और गाइडेंस में कोई बड़ा बदलाव नहीं है, लेकिन नेगेटिव सेंटीमेंट इस स्टॉक को नीचे धकेल रहे हैं।”

जेपी मॉर्गन ने अपने नोट में लिखा है कि केन्स के शेयर पिछले एक महीने में 25% नीचे आ गए हैं। वहीं अगर देखें तो पिछले 25 दिनों में से केवल पांच दिन ही यह शेयर हरे निशान में बंद हुआ है। हालांकि, इस गिरावट के बावजूद जेपी मॉर्गन ने इस शेयर पर अभी अपनी ‘Overweight’ की रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का इस शेयर के लिए 7,550 रुपये का टारगेट प्राइस है, जो इसके पिछले बंद भाव से लगभग 52% की संभावित तेजी का संकेत देता है।

कोटक के आरोप और कंपनी का स्पष्टीकरण

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपने नोट में दावा किया कि FY25 के लिए केन्स टेक्नोलॉजी, केन्स इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और इसकी सब्सिडियरी Iskraemeco की फाइलिंग्स में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।

कोटक ने कहा, “Iskraemeco की फाइलिंग्स में केन्स इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से 180 करोड़ रुपये की खरीदारी दिखाई गई है, लेकिन यह ट्रांजैक्शन केन्स इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के अपने रिलेटेड-पार्टी डिस्क्लोजर में नहीं दिखता है। इस्क्रामेको ने साल के अंत में केन्स टेक्नोलॉजी को 320 करोड़ रुपये और केन्स इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को 180 करोड़ रुपये का पेयबल्स दिखाया है। इसके अलावा, उसने केन्स टेक्नोलॉजी से ₹190 करोड़ का रिसीवेबल दिखाया है। कोटक ने बताया कि ये बैलेंस केन्स टेक्नोलॉजी या केन्स इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के रिलेटेड-पार्टी डिस्क्लोजर में नहीं दिखते हैं।

सब्सिडियरी की लगभग सभी चालू देनदारियां (receivables) उसकी पैरेंट कंपनी से जुड़ी बताई गई हैं, जिनमें से ₹45.8 करोड़ एक साल से अधिक पुराने हैं। कोटक ने कहा कि यह स्थिति समूह के भीतर इंटर-कंपनी लेन-देन पर गंभीर सवाल उठाती है और गहन जांच की जरूरत है।

Kaynes Technology का बयान

कंपनी ने इस मामले में 5 दिसंबर को एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा, “ये विवरण अनजाने में हमारे स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट में शामिल नहीं किए गए थे। इन्हें अब सुधार लिया गया है और भविष्य में कंप्लायंस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ये सभी ट्रांजैक्शन दोनों इकाइयों के कंसॉलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट का हिस्सा थे।”

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