पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लगभग एक महीने बाद उनकी बहन डॉ. उजमा खातून से मिलने की इजाजत मिल गई है. बताया जा रहा है कि डॉ. उजमा जेल परिसर के अंदर पहुंच चुकी हैं, जहां वह इमरान खान से मुलाकात करेंगी. अदियाला जेल के बाहर विरोध प्रदर्शनों के बीच इमरान खान की बहन डॉ. उजमा खान को आखिरकार जेल प्रशासन ने अंदर बुलाया. इमरान की अन्य बहनें भी सुबह 11:30 बजे जेल पहुंचीं, लेकिन उन्हें फिलहाल मिलने की इजाजत नहीं मिली है.
जेल के आसपास सुरक्षा अभेद्य
अदियाला जेल परिसर के आसपास सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है. जेल तक जाने वाले सभी रास्तों को कंटेनरों और ट्रकों से ब्लॉक कर दिया गया है. हर मार्ग पर पुलिस और रेंजर्स की भारी तैनाती की गई है. लोगों की लगातार तलाशी ली जा रही है और सिर्फ अधिकृत लोगों को ही आगे बढ़ने दिया जा रहा है.
धारा 144 और गोली चलाने के आदेश लागू
रावलपिंडी में धारा 144 लागू कर दी गई है जिससे किसी भी तरह की भीड़ या रैली पर प्रतिबंध है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशासन ने ‘शूट एट साइट’ के आदेश जारी कर दिए हैं यानी हिंसा या तोड़फोड़ की स्थिति में सुरक्षा बल सीधे गोली चला सकते हैं. पेशावर में भी प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए ऐसा ही आदेश लागू किया गया है.
PTI समर्थक पीछे हटने को तैयार नहीं
कड़े प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद PTI समर्थक बड़ी संख्या में अदियाला जेल के बाहर मौजूद हैं. प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी जारी रखी है और माहौल तनावपूर्ण है. स्थिति लगातार बदल रही है और प्रशासन हाई अलर्ट पर है.
इससे पहले पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन अलीमा खान की वह याचिका सोमवार को खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून के तहत लगे आरोपों को हटाने का अनुरोध किया था. ये आरोप अलीमा के खिलाफ नवंबर 2024 में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान द्वारा आहूत विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दर्ज किए गए मामले का हिस्सा हैं.
मामला रावलपिंडी के सादिकाबाद पुलिस थाने में दर्ज किया गया था, जिसमें अलीमा सहित 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था और उनपर अवैध विरोध प्रदर्शन, सरकार-विरोधी नारेबाजी करने, तोड़फोड़ और पथराव करने का आरोप लगाया गया था. आतंकवाद-रोधी अधिनियम की धारा-सात के तहत आतंकवाद के आरोपों को हटाने का अनुरोध करते हुए अलीमा ने रावलपिंडी स्थित आतंकवाद-रोधी अदालत का रुख किया था.
Read More at www.abplive.com