
जैन पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक बार जब एक कमजोर गर्भ वाली ब्रह्माण महिला गर्भवती हुई, तो इंद्र ने बच्चे को ब्रह्माण महिला के गर्भ से एक क्षत्रिय महिला के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया, और इस तरह तीर्थंकर का जन्म हुआ. यह कहानी एक उच्च आध्यात्म से जुड़े व्यक्तित्व तीर्थंकर की जन्म परिस्थिति को दिखाने का धार्मिक तरीका है, न की प्राचीन प्रजन्न विज्ञान का उदाहरण.

बंगाली रामायण कृतिभाषी के अनुसार, दिलीप की दो विधवा रानियां एक-दूसरे से प्यार कर महान राजा भगीरथ को जन्म दिया. दो विधवाओं द्वारा किसी बच्चे को जन्म देने वाली कहानी पूरी तरह से पौराणिक और प्रतीकात्मक भी हो सकती है. इस पर विश्वास करना या न करना ये लोगों की आस्था पर निर्भर करता है.

एक बार अप्सरा कीर्तची को देखकर,ऋषिभरद्वाज का अनजाने में वीर्य निकल गया. उन्होंने उस वीर्य को फौरन द्रोण नाम के बर्तन में संरक्षित कर लिया और इस तरह द्रोणाचार्य का जन्म हुआ. इस घटना को भारतीय ग्रंथों में मानव जनन प्रक्रिया के वैकल्पिक तरीकों में देखा जाता है.

महाभारत काल में जब गांधारी ने मांस के लोथड़े को जन्म दिया, तो व्यास ने मांस के 101 टुकडों में काटकर, उसे एक विशेष कक्ष में दवा वाले जार में रखा. उन जारों से कौरवों ने जन्म लिया. भारतीय महाकाव्यों में इस प्रक्रिया को अलौकिक रूप से प्रस्तुत किया गया है. लेकिन वैज्ञानिक रूप से इस तरह की तकनीक पूर्ण रूप से मिथक से भरी है.

राजकुमारियां कद्रू और विनत ने अंडों को जन्म दिया. कद्रू के अंडे से हजारों की संख्या में नाग पैदा हुए, और विनता के अंडे से गरुड़ और अरुण पैदा हुए. यह कहानी पूरी तरह से दैवीय प्रजातियों की उत्पत्ति की पौराणिका परंपरा पर आधारित है.

राजा युवनेश्व गलती से अपनी पत्नी के लिए बनी फर्टिलिटी दवा पी लेते हैं, जिससे राजा प्रेग्नेंट हो जाते हैं और बच्चा राजा की जांघ से बाहर निकलता है. लोग शायद ही इन बातों पर यकीन करें, लेकिन जब बाकी दुनिया जंगलों में जानवरों का शिकार कर रही थी, तब भारत के महान भारतीय दिमागों ने इन संभावनाओं की कल्पना की, जो किसी भी जीनियस से कम नहीं हैं.
Published at : 28 Nov 2025 04:27 PM (IST)
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