
नीम करोली बाबा 20वीं सदी के महान संत थे, जिन्होंने हमें सिखाया कि जीवन को प्रेम, ईमानदारी और सादगी के साथ कैसे जीना चाहिए. उनका मानना था कि बाहरी सफलता से ज़्यादा ज़रूरी है हमारी आंतरिक शांति और सच्चाई बनी रहे. वे कहते हैं कि सफलता की पहली शर्त है मन का शांत होना. यदि आपका मन भटकता रहेगा, तो आप किसी भी काम में पूरी तरह ध्यान नहीं लगा पाएंगे.

नीम करोली बाबा के अनुसार अतीत की गलतियाँ या दुखों को याद करके परेशान न हों. पुरानी बातों से चिपके रहना आपको आगे बढ़ने से रोकता है. बाबा का कहना था कि जो व्यक्ति बीते समय को छोड़कर वर्तमान में जीना सीख जाता है, वही ज़िंदगी का आनंद लेता है.

बाबा कहते थे कि सच कभी नहीं हारता है. हो सकता है कि कुछ देर के लिए झूठ हावी हो जाए, लेकिन अंत में जीत हमेशा सत्य की ही होती है. इसलिए हर हाल में ईमानदारी और सच्चाई पर टिके रहें. यह आपको समाज में सम्मान और मन में शांति दोनों देगा.

उनके अनुसार जब आप सच्चे मन से भगवान को याद करते हैं, तो आपके जीवन से सारी नकारात्मकता दूर हो जाती है. भक्ति करने से मन शांत होता है. आप महसूस करेंगे कि आत्मविश्वास बढ़ रहा है. है. इससे मुश्किल से मुश्किल समय में भी उम्मीद बनी रहती है.

बाबा ने प्रेम, दया और सेवा को जीवन में सबसे ऊपर रखा. उनका मानना था कि जब आप सभी लोगों के साथ एक जैसा व्यवहार करते हैं और किसी से भेदभाव नहीं करते, तो आपके अंदर एक दैवीय गुण पैदा होता है. यही भाव आपको सच्ची सफलता दिलाता है.

बाबा कहते थे कि भक्त और भगवान के बीच का सबसे मज़बूत बंधन विश्वास है. जब आप पूरी श्रद्धा के साथ ईश्वर पर भरोसा रखते हैं, तो आपका जीवन स्वयं ही सही दिशा में चलने लगता है और आपको अपने हर प्रयास में सफलता मिलती है.

बाबा का सबसे बड़ा संदेश यह था कि बाहरी चीजों या साधनों से सफलता नहीं मिलती. असली सफलता आपकी आंतरिक स्थिरता, मन की शांति और सच्चाई का पालन करने से आती है. सबसे पहले अपने अंदर की सच्चाई और शांति रहना सीखें.
Published at : 26 Nov 2025 06:00 AM (IST)
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