Gem Astrology: काला हकीक कौन कर सकता है धारण, जानें धारण करने से पहले नियम और लाभ!

मानव जीवन में कई तरह के बदलाव होते हैं, वहीं कभी-कभी ये बदलाव हमें खोखला कर देते हैं . इन परेशानियों से बचने के लिए कुंडली के अनुसार रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है, तो ऐसे में आइए जानते हैं काला हकीक रत्न धारण करने के लाभ.

मानव जीवन में कई तरह के बदलाव होते हैं, वहीं कभी-कभी ये बदलाव हमें खोखला कर देते हैं . इन परेशानियों से बचने के लिए कुंडली के अनुसार रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है, तो ऐसे में आइए जानते हैं काला हकीक रत्न धारण करने के लाभ.

काला हकीक एक अर्ध-कीमती रत्न है जिसे धारण करने से शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभावों से बचाव होता है, साथ ही यह बुरी नजर और जादू-टोने के प्रभावों से बचाव करता है.

काला हकीक एक अर्ध-कीमती रत्न है जिसे धारण करने से शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभावों से बचाव होता है, साथ ही यह बुरी नजर और जादू-टोने के प्रभावों से बचाव करता है.

यह मानसिक तनाव, डर और मनोदशा को दूर करता है, आत्मविश्वास, धैर्य और मानसिक शांति को बढ़ाता है. इतना ही नहीं काला हकीक आर्थिक मामलों में वृद्धि लाने और व्यापार में सफलता दिलाने में सहायक हो सकता है.

यह मानसिक तनाव, डर और मनोदशा को दूर करता है, आत्मविश्वास, धैर्य और मानसिक शांति को बढ़ाता है. इतना ही नहीं काला हकीक आर्थिक मामलों में वृद्धि लाने और व्यापार में सफलता दिलाने में सहायक हो सकता है.

काला हकीक वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ राशि के लोग धारण कर सकते हैं, खासकर यदि उनकी कुंडली में शनि या राहु सकारात्मक हों. यह रत्न उन लोगों के लिए भी लाभकारी है जिन पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, क्योंकि यह शनि के अशुभ प्रभावों को कम करता है.

काला हकीक वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ राशि के लोग धारण कर सकते हैं, खासकर यदि उनकी कुंडली में शनि या राहु सकारात्मक हों. यह रत्न उन लोगों के लिए भी लाभकारी है जिन पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, क्योंकि यह शनि के अशुभ प्रभावों को कम करता है.

काला हकीक धारण करने से पहले, इसे दूध और गंगाजल से शुद्ध करें, और शनिवार या मंगलवार की शाम को शनि के बीज मंत्र (ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः) का 108 बार जाप करके धारण करें.

काला हकीक धारण करने से पहले, इसे दूध और गंगाजल से शुद्ध करें, और शनिवार या मंगलवार की शाम को शनि के बीज मंत्र (ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः) का 108 बार जाप करके धारण करें.

यह रत्न लॉकेट या चांदी, पंचधातु या लोहे की अंगूठी में धारण किया जा सकता है, और अंगूठी को दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में पहनना सबसे अच्छा माना जाता है.

यह रत्न लॉकेट या चांदी, पंचधातु या लोहे की अंगूठी में धारण किया जा सकता है, और अंगूठी को दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में पहनना सबसे अच्छा माना जाता है.

Published at : 24 Nov 2025 01:47 PM (IST)

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