
हिंदू धर्म में धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, रात का वक्त देवी-देवता के पूजन, विश्राम और शांति का माना गया है. शास्त्रों के मुताबिक, सूर्यास्त होने के बाद देवताओं की गति शांत हो जाती है और नकारात्मक शक्तियों का प्रवाह बढ़ जाता है. ऐसे में गृहस्थ कर्मों में रात को कपड़े धोना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इसे करने से घर की सात्त्विकता और सकारात्मक ऊर्जा बाधित होती है. गृह्यसूत्रों और कुछ धार्मिक ग्रथों में रात को कपड़े धोने की मनाही है.

ज्योतिषीय नजरिए के मुताबिक, रात के वक्त चंद्रमा की प्रभावशक्ति बढ़ जाती है. चंद्रमा मन और जल का कारक माना गया है. मान्यताओं के मुताबिक रात में अधिक जल से जुड़े काम करने पर मानसिक अस्थिरता, बेचैनी और अनावश्यक तनाव का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि यह आस्था से जुड़ा है लेकिन प्रमाणित नहीं है.

शास्त्रों के अनुसार, गृह कार्य करने का सबसे शुभ समय अभिजीतकाल और ब्रह्ममुहूर्त का है. मनुस्मृति सहित कई नीतिग्रंथों में रात का वक्त मानसिक शांति और पारिवारिक चर्चा के लिए बताया गया है. रात के समय कपड़े धोना इसलिए भी अशुभ क्योंकि, यह क्रिया तामसिक श्रेणी से जुड़ी मानी जाती है.

धार्मिक नजरिए से भी कहा जाता है कि, रात में कपड़े धोने से मां लक्ष्मी भी नाराज हो जाती है. वजह यह है कि, पुराने समय में रात को पानी भरने से लेकर कपड़ों को धोना और सुखाना असुरक्षित माना जाता था. समय बीतने के साथ पहले से चली आ रही सावधानियां शुभ-अशुभ जैसे कार्यों में गिनी जाने लगी.

कई धार्मिक पंडित यह तर्क भी देते हैं कि, रात के समय पानी का ज्यादा इस्तेमाल करने से चंद्र दोष और राहु केतु की नकारात्मक ऊर्जा का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि इस तरह के दावें शास्त्रीय और पुराणों में प्रत्यक्ष रूप से देखने को नहीं मिलते हैं.

असल मायनों में बदलते समय के साथ कपड़े रात के समय धोना अशुभ है, ऐसी बातें शायद ही कोई मानें, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिए से इसका महत्व आज भी बना हुआ है. वैसे कपड़े धोने जैसे कार्य रात के समय करने से परहेज करना चाहिए.
Published at : 22 Nov 2025 04:35 PM (IST)
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