दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार (19 नवंबर, 2025) को ताइक्वांडो खेल में जारी लंबे विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा कि खेल मंत्रालय किसी अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन के मनमाने फैसले पर चलकर किसी भी संस्था को नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन की मान्यता नहीं दे सकता है. कोर्ट ने कहा कि मंत्रालय कोई रबर स्टैंप नहीं है, जो अंतरराष्ट्रीय संगठनों की ओर से चुनी गई किसी भी इकाई को मान्यता दे दे.
ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया ने हाई कोर्ट में दाखिल की अर्जी
यह मामला ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया की उस याचिका से जुड़ा था, जिसमें उसने मंत्रालय की ओर से 8 मई, 2025 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें इंडिया ताइक्वांडो को खेल का NSF मान लिया गया था. TFI ने कहा कि वह पहले से मान्यता प्राप्त NSF है और बिना कोई नोटिस दिए या उसका दर्जा हटाए मंत्रालय ने अचानक दूसरी संस्था को मान्यता दे दी.
कोर्ट ने पाया कि TFI को न तो कोई कारण बताओ नोटिस भेजा गया और न ही उसकी मान्यता निलंबित या वापस लेने का कोई आदेश जारी हुआ. इसके बावजूद मंत्रालय ने दूसरी संस्था को मान्यता दे दी, जो स्पोर्ट्स कोड के बिल्कुल खिलाफ है. कोर्ट ने कहा कि एक खेल के लिए सिर्फ एक ही NSF मान्यता प्राप्त हो सकता है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले में जताई नाराजगी
दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस सचिन दत्ता ने यह भी कहा कि ताइक्वांडो खेल लंबे समय से अव्यवस्था और विवाद में घिरा हुआ है और मंत्रालय को बिना जांच-पड़ताल किए किसी संस्था को मान्यता नहीं देनी चाहिए भले ही उसे अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन की मान्यता मिली हो. कोर्ट ने मंत्रालय का आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि सभी हितधारकों TFI और इंडिया ताइक्वांडो को सुनकर तय किया जाए कि भारत में ताइक्वांडो का अधिकृत NSF कौन होगा. साथ ही मंत्रालय को यह भी कहा गया कि वह स्पोर्टस कोड और अच्छी शासन व्यवस्था के अनुसार तर्कपूर्ण आदेश जारी करे. जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया ही भारत में ताइक्वांडो का आधिकारिक NSF बना रहेगा.
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