
कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर की रात 10:36 बजे से शुरू होकर 5 नवंबर की शाम 6:48 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार, देव दीपावली 5 नवंबर को मनाई जाएगी. इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है.

इस दिन काशी के गंगा घाटों पर लाखों दीप जलाए जाते हैं. जब एक साथ घाटों पर दीपों की कतारें जलती हैं तो पूरा शहर स्वर्ग जैसा दिखाई देता है. इस दृश्य को देखने देश-विदेश से लोग वाराणसी पहुंचते हैं.

कहते हैं कि भगवान शिव ने इस दिन त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था. उनकी इस विजय के उपलक्ष्य में देवताओं ने काशी में दीप जलाकर उत्सव मनाया था. तभी से यह पर्व देव दीपावली के नाम से प्रसिद्ध हुआ.

मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा की रात सभी तैंतीस करोड़ देवी-देवता स्वर्ग से उतरकर काशी आते हैं. वे गंगा स्नान करते हैं और घाटों पर दीप जलाकर भगवान शिव को नमन करते हैं.

देव दीपावली के दिन गंगा के 84 घाटों को लाखों मिट्टी के दीयों से सजाया जाता है. दीपों की यह अद्भुत रोशनी गंगा जल में प्रतिबिंबित होकर एक अलौकिक नजारा प्रस्तुत करती है.

इस दिन शाम को भव्य गंगा आरती की जाती है. पारंपरिक वस्त्रों में सजे पुजारी मंत्रोच्चार के साथ दीपों से आरती करते हैं. भक्त इस दिव्य क्षण का अनुभव करने के लिए घंटों पहले घाटों पर एकत्र होते हैं.

देव दीपावली के दिन गंगा स्नान और दीपदान करने से सभी पापों का नाश होता है. भक्तों का विश्वास है कि इससे जीवन में शांति, सुख और समृद्धि आती है. यह पर्व गंगा माता और भगवान शिव के प्रति आस्था का सुंदर प्रतीक है.
Published at : 01 Nov 2025 10:33 PM (IST)
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