राजस्थान में सरकार निकाय व पंचायत चुनाव से पहले चुनाव लड़ने के लिए दो संतान की बाध्यता हटा सकती है, सरकार इस पूरे मामले पर विचार कर रही है. UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा, “जब सरकारी कर्मचारी पर तीन साल का प्रतिबंध लगा उसमें राहत दे दी गई, तो फिर जन प्रतिनिधियों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए, उनको भी इतनी छूट तो मिलनी चाहिए.”
देश और राज्य के हित में जनसंख्या नियंत्रण बहुत महत्वपूर्ण विषय हैं, इसको लेकर जन प्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारियों को लेकर पहले एक से नियम बनाए गए थे. बाद में सरकारी कर्मचारियों को इस नियम में छूट दे दी गई, जबकि जन प्रतिनिधियों पर ये लागू रहा है. अब इस मामले पर राज्य सरकार विचार विमर्श कर रही है, ऐसे में अगले निकाय चुनाव से पहले इस नियम में संशोधन होने की संभावना है.
मंत्री बोले- जनप्रतिनिधि व सामाजिक संगठन कर रहे थे मांग
UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि लगातार जनप्रतिनिधियों व सामाजिक संगठनों की ओर से यह माँग उठायी जा रही थी, जब सरकारी कर्मचारियों को इसमें राहत दे दी गई तो फिर जन प्रतिनिधियों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से भी चर्चा हुई है, सबकी राय ली जानी चाहिए. उसके बाद विभाग आगे से आगे पत्र भेजकर बात रखेगा, अंतिम फ़ैसला सरकार को ही करना है. इस मामले में जो भी उचित होगा, वही निर्णय लिया जाएगा.
मंत्री खर्रा ने यह भी कहा कि हम सभी मंत्रिमंडल के सदस्यों से विचार मंथन करके चुनाव से पहले यह निर्णय लेंगे की छूट देनी चाहिए या नहीं देनी चाहिए.
मौजूदा प्रावधान
- सरकार ने पंचायती राज और नगरपालिका कानूनों में संशोधन करके 27 नवंबर 1995 के बाद दो से ज्यादा संतान होने वालों को चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दे दिया था.
- 27 नवंबर 1995 के बाद अगर किसी के तीसरा बच्चा है तो वह पंच, सरपंच, उपसरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, प्रधान, जिला प्रमुख, पार्षद, सभापति, मेयर का चुनाव नहीं लड़ सकता.
- अगर किसी ने गलत जानकारी देकर चुनाव लड़ लिया और बाद में साबित हो जाए तो पद चला जाता है. जेल भी होती है.
- राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 24 में डिसक्वालिफाई के प्रावधान में इसे जोड़ा हुआ है.
- 27 नवंबर 1995 से पहले किसी के चाहे कितने ही बच्चे हों, उसे चुनाव लड़ने की छूट है, उस पर बाध्यता लागू नहीं होती है.
- 27 नवंबर 1995 के पहले से एक बच्चा है, फिर दूसरी बार जुड़वां बच्चे पैदा हो गए तो उसे चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा. जुड़वां बच्चों को एक ही इकाई माना जाएगा.
- किसी के तीन बच्चे हैं और एक बच्चा गोद दे दिया है तो वह चुनाव नहीं लड़ सकेगा. गोद दिए हुए बच्चे को भी गिना जाएगा.
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