Gopashtami 2025: राधा रानी भी चराने जाती थीं गाय, जानिए गोपाष्टमी की पौराणिक कथाएं

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Gopashtami 2025: गोपाष्टमी का त्योहार इस वर्ष 30 अक्तूबर 2025 को मनाया जाएगा. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण पहली बार गाय चराने के लिए गए थे. जिसके बाद से इस दिन को गोपाष्टमी त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा.

उसी दिन के बाद से हर वर्ष गोवर्धन पूजा के सात दिन बाद इस त्योहार को मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई. इस दिन गौ माता और बछड़े की भी पूजा की जाती है.

गाय और बछड़े की पूजा के साथ-साथ भगवान श्री कृष्ण को भी याद किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन गाय की पूजा करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं और मनवांछित फल देते हैं. गोपाष्टमी से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित है. चलिए आज हम आपको दो पौराणिक कथाओं के बारे में बताते हैं. 

पहली पौराणिक कथा
जब भगवान कृष्ण ने पांच साल पूरा करके छठे साल में प्रवेश किया तो उन्होंने यशोदा मैया के सामने जिद्द ठान दी. जिद्द ऐसी थी कि यशोदा मैया को कुछ सूझ नहीं आ रहा था.

बाल कृष्ण यशोदा मैया से कहने लगे मैया अब मैं बड़ा हो गया हूं और अब मैं इन बछड़ों के अलावा गाय भी चराने जाऊंगा. पहले तो मैया यशोदा उन्हें मनाने की कोशिश की. लेकिन जब कृष्ण अपनी बात पर अड़े हुए थे तब मैया को अपने बाल कृष्ण के आगे हार माननी पड़ी.

आज्ञा के लिए नंदबाबा के पास भेजा
मैया यशोदा ने उन्हें इस बात की आज्ञा लेने के लिए नंदबाबा के पास भेज दिया. मैया को शायद उम्मीद थी कि नंद बाबा बाल कृष्ण को समझा बुझाकर शांत करा देंगे. लेकिन कृष्ण तो कृष्ण ही थे . उन्होंने नन्दबाबा के सामने भी अपनी जिद्द जारी रखी, और कहा कि अब गाय तो मैं ही चराने के लिए ले जाऊंगा.

भगवान के सामने नंदबाबा की एक न चली
भगवान कृष्ण की जिद्द के सामने जब नंद बाबा की एक न चली तब वह गाय चराने के लिए मुहूर्त निकलवाने के लिए शांडिल्य ऋषि के पास पहुंच गए. जब नंदबाबा ने शांडिल्य ऋषि को यह बात बताई तो उन्होंने बताया कि मुहूर्त तो अभी इसी समय का बन रहा है.

शेष कोई अन्य मुहूर्त नहीं हैं अगले एक साल तक. उसी दिन के बाद से हर साल गोपाष्टमी का त्योहार मनाया जाने लगा.

दूसरी पौराणिक कथा
गोपाष्टमी से जुड़ी एक और पौराणिक कथा है, कि इस दिन राधा रानी भी अपनी गाय को चराने के लिए घर से बाहर वन में जाना चाहती थी. लेकिन, लड़की होने की वजह उन्हें कोई हां नहीं कर रहा था.

काफी कोशिश के बाद जब राधा रानी थक हार गई तब उन्हें एक उपाय सूझी. वह ग्वालों जैसे कपड़े पहनकर वन में प्रभु श्रीकृष्ण के साथ गाय चराने निकल पड़ी.

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