
छठ पूजा एक अत्यंत पवित्र और कठोर व्रत है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की उपासना की जाती है। लेकिन कई बार व्रत के दौरान महिलाओं को मासिक धर्म (पीरियड्स) शुरू हो जाता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या पूजा जारी रखी जा सकती है. जानें इसके बारे में–

पीरियड्स के समय पूजा करने को लेकर अलग-अलग मत है. कुछ लोग मानते हैं कि इस दौरान धार्मिक कार्य नहीं करने चाहिए, जबकि कुछ इसे सामान्य शारीरिक प्रक्रिया मानते हैं.

अगर छठ पूजा के दौरान पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो व्रती महिला व्रत जारी रख सकती है. यह व्रत पीढ़ियों से चलता आ रहा है, इसलिए इसे अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए. व्रती की जगह पर कोई इसे नहीं कर सकता है.

मासिक धर्म के दौरान व्रती महिला को पूजा की सामग्री जैसे प्रसाद, अर्घ्य की टोकरी, फल या दूध को सीधे हाथ लगाने से बचना चाहिए. यह शुद्धता की परंपरा मानी जाती है. महिला मानसिक रूप से पूजा में जुड़ी रह सकती हैं और परिवार के साथ श्रद्धा से प्रार्थना कर सकती हैं.

इस समय प्रसाद बनाना, पूजा की वस्तुएं घाट तक ले जाना या अर्घ्य देना जैसे कार्य परिवार के किसी सदस्य को सौंप सकते हैं. सहयोगी को भी स्वच्छता और श्रद्धा का पूरा ध्यान रखना चाहिए. व्रती महिला घाट पर जाकर केवल हाथ जोड़कर सूर्य देव से प्रार्थना कर सकती हैं.

मासिक धर्म के शुरुआती चार दिनों में अर्घ्य देना उचित नहीं माना जाता. यदि पांचवां दिन हो, तो स्नान और स्वच्छता के बाद सहयोगी के माध्यम से अर्घ्य दिलाया जा सकता है. महिला स्वयं भी घाट पर रहकर मन से सूर्य देव को नमन कर सकती हैं.

पीरियड्स के दौरान छठ व्रत को छोड़े नहीं, लेकिन पूजा के कार्यों में शारीरिक रूप से भाग लेने से बचें. श्रद्धा, स्वच्छता और सहयोग से यह व्रत पूरी निष्ठा के साथ सम्पन्न किया जा सकता है.
Published at : 26 Oct 2025 11:29 AM (IST)
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