Mangal Gochar 2025: सोना, पेट्रोलियम और कोयले जैसी चीजों के गिरेंगे भाव या छुएंगे आसमान? वृश्चिक राशि में मंगल का गोचर दे रहा बड़े संकेत

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Mangal Gochar 2025: 27 अक्टूबर 2025 को मंगल अपनी स्वयं की राशि वृश्चिक में प्रवेश करेगा. यह स्थिति ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है क्योंकि बृहद्पाराशर होरा शास्त्र में कहा गया है, मङ्गलः भूम्यर्थधातुकारकः. अर्थात मंगल भूमि, धातु, खनिज और ऊर्जा से जुड़ी वस्तुओं में सक्रियता लाता है.

जब वह अपनी स्वराशि वृश्चिक में आता है, तो उसकी उर्जा अंदरूनी स्तरों पर गहराई से काम करती है. इसका सीधा प्रभाव बाजार, निवेश, भूमि-उद्योग, ऊर्जा कंपनियों और वस्तु-विनिमय दरों पर पड़ता है.

वृश्चिक राशि मंगल की स्वराशि मानी जाती है. ज्योतिष में मंगल को इस राशि का स्वामी बताया गया है. यहां आकर मंगल ग्रह बलवान होता है. ऐसे समय में यानी 27 अक्टूबर 2025 से 7 दिसंबर 2025 के बीच भूमि-संपत्ति, लोहे, तांबे, सोने, पेट्रोलियम और कोयले जैसी चीजों के भाव में तेजी देखी जा सकती है.

फलदीपिका में कहा गया है, स्वराशौ मङ्गले शुभं फलति, जब मंगल अपने घर में हो, तो शक्ति, साहस और बाजार की गतिविधि बढ़ती है. इसका अर्थ है कि उद्योग क्षेत्र, मशीनरी, निर्माण और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में लेन-देन और मांग बढ़ेगी.

इसके विपरीत, जल तत्व की राशियों में अग्नि ग्रह की उपस्थिति अस्थिरता लाती है. इसलिए शेयर मार्केट, करेंसी ट्रेड और लग्जरी लाइफस्टाइल से जुड़ी वस्तुओं में उतार-चढ़ाव बना रहेगा.

जातक पारिजात के अनुसार अग्निजलयोः संयोगे अस्थैर्यम्. अर्थात अग्नि और जल का मेल अस्थिरता देता है. इससे स्टॉक मार्केट में स्पेक्युलेटिव व्यवहार और डर से बिक्री (Panic Selling) की स्थिति बन सकती है.

निवेश के दृष्टिकोण से यह गोचर धैर्य और दीर्घ-दृष्टि का समय है. अल्पकालिक लाभ की अपेक्षा करने वाले निवेशक अस्थिरता से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि लंबी अवधि वाले निवेशक (3-6 महीने से अधिक) लाभ पा सकते हैं. भूमि, ऊर्जा, धातु और निर्माण सामग्री में योजनाबद्ध निवेश शुभ रहेगा, लेकिन उधार लेकर या भावनाओं में आकर निवेश करना नुकसानदायक साबित हो सकता है.

जैमिनि सूत्र कहता है मङ्गलात् भूम्यर्थं यन्त्रं च. यानी मंगल मशीनरी और भूमि के विकास को गति देता है. यह गोचर सरकार और निजी क्षेत्र दोनों में इन्फ्रास्ट्रक्चर या डिफेंस निवेश की गति बढ़ा सकता है. वहीं जल आधारित क्षेत्रों (जैसे पेय पदार्थ से जुड़े उद्योग, लग्जरी आइटम, गारमेंट, आयातित ब्रांड्स (Imported Brands) में ठहराव या मंदी आ सकती है.

मनोवैज्ञानिक रूप से यह गोचर मनुष्यों में निर्णय-तीव्रता और अधीरता बढ़ाता है. इसलिए निवेशकों को सलाह है कि किसी भी निर्णय से पहले डेटा, कंपनी फंडामेंटल्स और मूल ज्योतिषीय कालचक्र दोनों देखें. सरावली ग्रंथ में कहा गया है  मङ्गलेन धैर्यं हीनस्य नाशः. यानी अधैर्य ही विनाश का कारण बनता है. संक्षेप में कहें तो इन बातों का ध्यान रखें-

  • महंगी वस्तुएं: लोहा, तांबा, पेट्रोलियम, कोयला, भूमि, रियल एस्टेट
  • सस्ती या अस्थिर वस्तुएं: शेयर मार्केट, करेंसी, लग्जरी ब्रांड्स, आयातित सामान
  • क्या करें: दीर्घ निवेश, जोखिम-संतुलन, विविधीकरण
  • क्या न करें: उधार पर निवेश, जल्दबाजी, अफवाहों में निर्णय

इस गोचर का भाव यह है कि बाजार अब गहराई से चलने वाला महासागर बन रहा है. सतह पर उथल-पुथल रहेगी, लेकिन जो निवेशक संयम और विवेक के साथ निर्णय लेंगे, वे अगले चक्र में लाभ पाएंगे.

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