अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बार फिर चीन के साथ चल रहे ट्रेड वार को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और वे भविष्य में अच्छे संबंधों की ओर बढ़ेंगे। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि उनके पास ऐसी “अद्भुत चालें” हैं, जिनका इस्तेमाल किया जाए तो चीन “तबाह” हो सकता है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल वे उन कार्ड्स को इस्तेमाल नहीं करना चाहते।
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ द्विपक्षीय बैठक से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि मौजूदा ट्रेड वार में अमेरिका की स्थिति चीन से कहीं अधिक मजबूत है। उन्होंने कहा, “हमारा चीन के साथ बहुत अच्छा रिश्ता होगा… उनके पास कुछ कार्ड्स हैं, लेकिन हमारे पास कई अद्भुत कार्ड्स हैं। मैं उन कार्ड्स को खेलना नहीं चाहता, अगर मैं ऐसा करूं तो चीन बर्बाद हो जाएगा। लेकिन मैं ऐसा नहीं करने जा रहा।”
ट्रंप के इन बयानों से यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वे किस “कार्ड्स” की ओर इशारा कर रहे थे। वह आर्थिक ताकत की बात कर रहे थे, राजनीतिक असर की या फिर किसी दूसरे चीज की।
ट्रंप ने यह भी बताया कि हाल ही में उनकी बातचीत चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई थी और वे निकट भविष्य में चीन का दौरा करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “संभव है कि इस साल के भीतर या उसके तुरंत बाद हम चीन जाएं।” बता दें कि पिछले महीने शी जिनपिंग ने ट्रंप को चीन आने का निमंत्रण दिया था।
अमेरिका और चीन ने 12 अगस्त को ट्रेड युद्धविराम को 90 दिनों के लिए बढ़ाने पर और बातचीत को समय देने पर सहमति जताई थी। इससे पहले ट्रंप ने चीन चीन से आने वाले सभी सामानों पर टैरिफ बढ़ाया था, जो अप्रैल में 145 प्रतिशत तक पहुंच गया था। हालांकि अब अधिकतर चाइनीज समानों पर टैरिफ घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है। दूसरी ओर चीन ने भी जवाबी कार्रवाई के तौर पर अमेरिकी सामानों पर 10 प्रतिशत का टैरिफ बनाए रखा है।
ट्रंप ने चीन की ‘रेयर अर्थ पॉलिसी’ को भी निशाना बनाया और कहा कि अगर बीजिंग अमेरिका को जरूरी मैग्नेट सप्लाई करना बंद करता है, तो अमेरिका को 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाना पड़ सकता है। चीन ने अप्रैल में रेयर अर्थ के एक्सपोर्ट पर पाबंदियां सख्त कर दी थीं, जो उसकी जवाबी कार्रवाई का हिस्सा था।
इससे पहले अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी चीन की ऑयल खरीद पॉलिसी को भी विवाद का अहम बिंदु बताया था। उन्होंने कहा था कि चीन ईरान और रूस जैसे प्रतिबंधित देशों से तेल आयात कर रहा है, और यह मुद्दा स्वीडन में हुई व्यापारिक बातचीत में भी छाया रहा था।
बेसेंट का यह भी मानना है कि तेल के अलावा अमेरिका की चिंता चीन के इंडस्ट्रियल वर्चस्व को कम करना है। उन्होंने पहले भी तर्क दिया है कि चीन को अपनी एक्सपोर्ट-आधारित अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करना चाहिए और एक ग्लोबल आयातक के रूप में भी बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।
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