Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन हिंदू धर्म का विशेष महत्व वाला त्योहार माना जाता है.यह त्योहार इस साल 9 अगस्त को मनाया जाने वाला है. रक्षाबंधन के दिन पहली राखी ईश्वर को ही बांधनी चाहिए. इससे ईश्वर हर संकट से रक्षा करते हैं. ईश्वर को राखी घर का पुरुष और महिला दोनों बांध सकते हैं.
अनेक परिवारों में सावन पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डूगोपाल को भी राखी बांधी जाती है.
ज्योतिषाचार्य से जानें राखी का महत्व
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन बहनों के भाई नहीं होते,वे भी देवों को भाई मान कर राखी बांध सकती हैं.
अनेक लोग अलग-अलग देवताओं को भी राखी बांधते हैं. सबसे पहले देवी-देवताओं को राखी अर्पित करने से भाई-बहन को आशीर्वाद प्राप्त होता है. यह पवित्र त्यौहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है.
रक्षाबंधन पर पूरा दिन रहेगा शुभ
ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास ने बताया कि सावन के महीने के आखिरी दिन यानी के श्रावण पूर्णिमा को रक्षाबंधन मनाया जाता है. अबकी बार श्रावण पूर्णिमा 8 अगस्त शुक्रवार को दोपहर 2:12 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 9 अगस्त को दोपहर 1:21 मिनट तक रहेगी.
ऐसे में उदया तिथि की मान्यता के अनुसार रक्षाबंधन शनिवार 9 अगस्त को मनाया जाएगा. रक्षाबन्धन पर्व श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को भद्रा रहित तीन मुहूर्त या उससे अधिक व्यापिनी पूर्णिमा को अपराह्न काल व प्रदोष काल में मनाया जाता है. इस दिन पूर्णिमा तिथि दोपहर 01:24 तक है.
भाई से पहले भगवान को बांधे राखी
इस वर्ष रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा का साया नहीं होगा. अतः पूरा दिन शुद्ध है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्योहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.
इस खास दिन देवी-देवताओं की पूजा का भी विशेष महत्व होता है. ऐसे में भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले भगवान को राखी अर्पित करना चाहिए.
- गणेश जी : भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि गणेश जी देवताओं में प्रथम पूजनीय माने जाते हैं.इस कारण रक्षाबंधन के दौरान सबसे पहले गणपति जी को राखी अर्पित करें. ऐसा करने से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं.
- हनुमान जी: इस शुभ अवसर पर हनुमान जी राखी बांधना बहुत फलदायी माना जाता है. साथ ही जिन बहनों को अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने का मौका नहीं मिलता है, वे हनुमान जी को राखी बांध सकती हैं.
- शिव जी: रक्षाबंधन के पवित्र अवसर पर कई लोग महादेव को भी राखी चढ़ाते हैं. कहा जाता है कि ऐसा करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं. भक्त को सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है.
- श्री कृष्ण: भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन कई बहनें भगवान श्री कृष्ण को अपना भाई मानकर राखी बांधती हैं. कहा जाता है कि पूरी श्रद्धा से ऐसा करने पर श्री कृष्ण भक्तों की रक्षा करते हैं.
गुरु और शिक्षक को भी बांधे राखी
कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि व्यक्ति के जीवन में गुरु और शिक्षक का महत्वपूर्ण स्थान होता है. ईश्वर जन्म देता है तो गुरु मार्गदर्शन करता है और जीवन का बोध कराता है. अच्छे बुरे का भेद बताता है. शिक्षक के बिना हमें न सत्कर्म का ज्ञान हो सकता है और न ही ईश्वर का.
इसलिए समाज के प्रति उनके योगदान को देखते हुए राखी बांधकर उनका आभार प्रकट करना चाहिए. इसलिए इस दिन अपने गुरुजनों को रक्षा सूत्र बांधना चाहिए.
देश की सेवा करने वाले सैनिक को बांधे राखी
सैनिक को हम केवल वीरगति प्राप्त होने या स्वतंत्रता दिवस इत्यादि अवसरों पर ही याद करते हैं. लेकिन वह हमारी रक्षा के लिए परिवारवालों, समाज, मित्रों और सुख-सुविधाओं का त्याग कर जान हथेली पर रखकर घर से दूर खड़ा रहता है.
इसलिए रक्षाबंधन के विशेष अवसर पर महिलाओं को सीमा पर या छावनी पर उन्हें राखी बांधकर अपने पन का एहसास कराना चाहिए.
पेड़-पौधे को बांधे राखी
हमारे देश के वैज्ञानिक जेसी बसु ने सिद्ध किया था कि पेड़ पौधे संवेदनशील होते हैं और वो महसूस कर सकते हैं. आपने देखा होगा कि सकारात्मक वातावरण में पेड़ अच्छे से फलता-फूलता है जबकि एक नकारात्मक वातावरण में वह मुरझा जाता है.
इसलिए हिंदू धर्म में सभी प्रकार के पेड़-पौधों की पूजा का विधान है. ऐसे में रक्षाबंधन पर पेड़ पौधों को राखी बांधकर उनका आभार जताना चाहिए.
यजमान को जरूर बांधे रक्षासूत्र
यजमान और पुरोहित का गहरा पारस्परिक संबंध होता है. यजमान अपनी दक्षिणा के रूप में पुरोहित के जीवन निर्वाह में मददगार होता है तो पुरोहित अपने मार्गदर्शन से यजमान को भटकने से बचाता है और उनके कल्याण, निष्कंटक जीवन के लिए प्रार्थना करते हैं.
सबसे प्राचीन परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन पर पुरोहित अपने यजमान को राखी बांध कर उनके मंगल की कामना करते थे.
रक्षाबंधन पर इन बातों का रखें ध्यान
भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि इस दिन बहनों को सुबह स्नान करने के बाद भगवान को एक थाली में सुंदर से सजी हुई राखियां चढ़ाकर, लड्डुओं से भोग लगाना चाहिए.
फिर उनके माथे पर कुमकुम और चावल लगाने के बाद उन्हें राखी बांधें और उनकी आरती उतारें. इस दौरान उनसे जीवन भर रक्षा करने की प्रार्थना करनी चाहिए.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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