Maharashtra: शरद पवार को सियासी झटका, पूर्व विधायक बाबाजानी दुर्रानी ने कांग्रेस का थामा दामन

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है. खासकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के शरद पवार गुट के लिए यह वक्त कुछ ज्यादा ही चुनौतीभरा होता जा रहा है. ताजा मामला है पूर्व विधायक बाबाजानी दुर्रानी का है, जो अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. दुर्रानी पहले अजित पवार के साथ थे, फिर शरद पवार के खेमे में आए, लेकिन अब उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है.

कांग्रेस में एंट्री से पहले ही थे नाराज

बाबाजानी दुर्रानी का शरद पवार के गुट से मोहभंग अचानक नहीं हुआ. इसकी शुरुआत तब हुई जब उन्हें विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला. उन्हें उम्मीद थी कि शरद पवार गुट उन्हें टिकट देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. नतीजा ये रहा कि दुर्रानी ने निर्दलीय चुनाव लड़ा. तभी से उनकी नाराजगी धीरे-धीरे खुलकर सामने आने लगी थी.

वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद जॉइन की कांग्रेस

पिछले कुछ समय से बाबाजानी दुर्रानी कांग्रेस के नेताओं के संपर्क में थे. उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की, बातचीत की और फिर पार्टी में शामिल होने का फैसला किया. माना जा रहा है कि दुर्रानी के कांग्रेस में आने से मराठवाड़ा इलाके में पार्टी को फायदा मिल सकता है.

शरद पवार गुट को लगा बड़ा झटका

दुर्रानी के कांग्रेस में जाने से सबसे बड़ा झटका शरद पवार को लगा है. विधानसभा चुनाव के पहले अजित पवार से अलग होकर उनके गुट में शामिल हुए दुर्रानी को एक मजबूत चेहरा माना जाता था. अब जब स्थानीय स्वराज्य संस्था (नगर परिषद/पंचायत) के चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में उनका जाना संगठनात्मक स्तर पर बड़ी कमजोरी साबित हो सकता है.

पहले भी छूट चुके हैं कई नेता

यह पहली बार नहीं है जब शरद पवार गुट को ऐसे झटके लगे हैं. बीते कुछ महीनों में कई नेता पार्टी छोड़कर अलग राह पकड़ चुके हैं. अब बाबाजानी जैसे नेता का कांग्रेस में जाना ये संकेत देता है कि पार्टी के अंदरूनी हालात ठीक नहीं चल रहे.

कांग्रेस को मिलेगा स्थानीय स्तर पर फायदा

बाबाजानी दुर्रानी का कांग्रेस में आना मराठवाड़ा के कुछ इलाकों में समीकरण बदल सकता है. वे वहां एक लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं और जनता के बीच पकड़ भी रखते हैं. कांग्रेस इस मौके को भुनाने की पूरी कोशिश करेगी.

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