Premanand Maharaj: भगवान ने समस्त संसार की रचना की है. प्रत्येक प्राणियों को जीवन निर्वाह करने के लिए सक्षम बनाया. ऐसे में भगवान को मानने वाले भक्त उन्हें पूजा, जप-तप और साधना के जरिए खुश करते हैं. कोई मंदिर जाकर भगवान की उपासना करता है तो कोई तीर्थ पर जाकर उन्हें पूजता है. ऐसे में वृंदावन स्थित श्री हित राधा केलि कुंज प्रेमानंद महाराज के आश्रम में एक भक्त ने तीर्थ यात्रा की अनिवार्यता को लेकर सवाल किया.
प्रेमानंद महाराज के आश्रम में एक भक्त द्वारा तीर्थ यात्रा करने को लेकर सवाल किया, जिसके जवाब में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि, ‘जिस तरह मेहंदी में लालिमा होती है पर मेहंदी के पेड़ को हम चीड़ दे तो कही भी हमें लालिमा नजर नहीं आएगी. ये इस पेड़ की एक प्राकृति है. ठीक उसी तरह तीर्थ स्थल आध्यात्म के केंद्र हैं. जैसे कोई व्यक्ति गंगा नहाने के बाद पवित्रता का एहसास करता है. लेकिन ये एहसास तभी होता है, जब व्यक्ति नियमानुसार गंगा में नहाने का पालन करें. वही नियमानुसार गंगा स्नान ना करने पर आपको कोई भी दिव्य अनुभूति नहीं होगी.
प्रेमानंद महाराज तीर्थ यात्रा पर क्या कहा?
प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा, ‘तीर्थ यात्रा को अगर नियमानुसार किया जाए तो ये आपको दिव्य अनुभूति का एहसास कराता है. ये सभी तीर्थ स्थल हमें अध्यात्म का सहयोग देने के लिए बनाए गए हैं. इन स्थलों पर जानें से हमारी गलतियां और पाप नष्ट हो जाते हैं. इन तीर्थ स्थलों पर इसलिए जाया जाता है कि अगर हम से कुछ गलती हो जाती है तो यहां जाने से हमारे पाप खत्म हो जाते हैं. हमें गृहस्थ जीवन जीने के लिए नई साधना प्राप्त होती है. मनुष्यों को सभी तीर्थ यात्रा पर जाना चाहिए इससे आपका मन और तन दोनों शुद्ध होता है. हर किसी को तीर्थ पर कम से कम एक दिन का उपवास जरूर करना चाहिए. अगर तीर्थ यात्रा 3 दिन की है तो पहला दिन पूर्ण उपवास रखें, दूसरे दिन फलाहार करो और तीसरे दिन अन्नहार करें. तीर्थों पर जाकर कष्ट सहना चाहिए.
वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम में सदैव भक्तों की भीड़ रहती है. भक्त उनसे अपनी समस्या को साझा करते हैं. उनके भक्तों की सूची में आम जन से लेकर बड़ी बड़ी हस्तियां शामिल है. प्रेमानंद महाराज रोजाना अर्धरात्रि को वृंदावन में पदयात्रा पर निकलते हैं. जहां उनके दर्शन पाने के लिए भक्तों की लंबी लंबी कतारें उनके साथ-साथ चलती है. हाल में भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली भी उनसे मिलने आश्रम पहुंचे थे.
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