South Korea new president Lee Jae Myong who is being called Korean Donald Trump Know full story of his political journey criminal charges ann

South Korean Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पूरी दुनिया जूझ ही रही है कि सुदूर-पूर्व एशिया में तेजी से घटे राजनीतिक घटनाक्रम की तरफ कम ही लोगों का ध्यान गया है. इसी हफ्ते दक्षिण कोरिया में विपक्षी नेता ली जे-म्योंग को देश की जनता ने अपना नया राष्ट्रपति चुन लिया है. अभी तक उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग उन और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल से पूरी दुनिया तंग रहती थी कि अब पड़ोसी देश साउथ कोरिया में भी एक ऐसा राष्ट्रपति चुना गया है जिसे ‘कोरियाई डोनाल्ड ट्रंप’ की उपाधि दी जा रही है.

6 महीने पहले यानी 3 दिसंबर 2024 को जब दक्षिण कोरिया में छह घंटे के लिए मार्शल-लॉ लगाया गया तो पूरी दुनिया हतप्रभ रह गई थी. कभी पूंजीवाद के टॉप मॉडल के तौर पर देखे जाने वाले देश साउथ कोरिया में लोकतंत्र इतना कमजोर है कि तत्कालीन राष्ट्रपति (योन सूक योल) ने इमरजेंसी का ऐलान कर दिया. जिन विपक्षी पार्टियों के उत्तर कोरिया से हाथ मिलाए जाने का आरोप योल ने लगाए थे, उसी विपक्षी पार्टी ने इस महीने सत्ता में वापसी की है. योल ने हालांकि, देश की कमान संभालने को लेकर जबरदस्त कवायद की लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आगे घुटने टेक पड़े. छह महीने के हाई पॉलिटिकल ड्रामे के बाद दक्षिण कोरिया में आम चुनाव कराए गए. 3 जून को विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के ली को 49 प्रतिशत वोट मिले. योल के प्रॉक्सी उम्मीदवार किम मून सो को 41 प्रतिशत वोट मिले.

ली के राष्ट्रपति पद का रास्ता
ली के राष्ट्रपति पद का रास्ता भी सुप्रीम कोर्ट की दहलीज से होकर गुजरा है. इलेक्शन से पहले अगर सुप्रीम कोर्ट ने एक पुराने धांधली के मामले में री-ट्रायल का आदेश न दिया होता तो, ली के लिए चुनाव में लड़ना मुश्किल हो सकता था. ऐसे में कोरिया के नागरिक पूछ रहे हैं कि अगर री-ट्रायल में ली के खिलाफ आरोप सही पाए गए तो फिर क्या होगा. पिछले छह महीने से कोरियाई नागरिक सियोल की सड़कों पर हैं.  

उत्तर कोरिया में करेंसी स्मगलिंग का आरोप
ये अकेला आपराधिक मामला ली के खिलाफ नहीं है. तत्कालीन राष्ट्रपति मून जे इन (2017-22) के दौरान ली पर उत्तर कोरिया में करेंसी स्मगलिंग से लेकर भ्रष्टाचार, पद का दुरुपयोग, न्यायिक अवहेलना और चुनाव में धांधली जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं. खास बात ये है कि मून जे इन भी ली की पार्टी (डेमोक्रेटिक पार्टी) से ही ताल्लुक रखते थे. ऐसे में ली ने सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया था. क्योंकि ली को मून का राजनीतिक-प्रतिद्धंदी माना जाता था.

ली के गवाहों की मौत
ली पर कोर्ट में आरोप सिद्ध हो सकते थे, अगर इन मामलों से जुड़े पांच अहम गवाहों की संदिग्ध मौत नहीं होती. इन गवाहों ने या तो आत्महत्या कर ली थी या ट्रायल के दौरान स्वाभाविक मौत हो गई थी. कोरियाई पुलिस को हालांकि, इन सभी मौतों में कोई साजिश नजर नहीं आई और सभी केस फाइल बंद कर दी गई.  

अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ हुए मस्क
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ पूर्व सिपहसालार एलन मस्क ने पूर्व फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन की जेल में संदिग्ध मौत को लेकर जंग छेड़ दी है. एक्स के मालिक और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन ने ट्रंप और एपस्टीन की एक 33 साल पुरानी पार्टी का वीडियो जारी कर पूरे अमेरिका में सनसनी फैला दी है.यही वजह है कि सुदूर-पूर्व एशिया के पॉलिटिकल-पंडित भी ली को कोरिया का नया ‘डोनाल्ड ट्रंप’ करार दे रहे हैं. ट्रंप की तरह ली को भी कोरियाई राजनीति का बड़बोला कहा जाता है.

अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियां
कोरिया के ट्रंप (यानी ली) को अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियों से भी दो-चार होना पड़ेगा. कोरियाई युद्ध (1950-53) के बाद से ही साउथ कोरिया की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका के हाथों में है. नॉर्थ कोरिया के पारंपरिक युद्ध और न्यूक्लियर वॉर, दोनों के खिलाफ अमेरिका ने दक्षिण कोरिया को सुरक्षा का करार किया हुआ है. बावजूद इसके, ट्रंप ने ट्रेड-वॉर की लिस्ट में दक्षिण कोरिया को शामिल कर लिया है. साथ ही दक्षिण कोरिया में तैनात करीब 30 हजार अमेरिकी सैनिकों के लिए दी जाने वाली राशि को भी बढ़ाए जाने का मन ट्रंप ने बना रखा है.

दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति की चुनौती
दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति ली को चुनौती सिर्फ डीएमजेड (डि-मिलिट्राइज जोन) पर सनकी तानाशाह किम जोंग उन की बैलिस्टिक मिसाइल से ही नहीं बल्कि ओरिजनल ट्रंप से भी है. लेकिन कुछ समय के लिए ली चैन की सांस ले सकते हैं. क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल एलन मस्क के साथ नूरा-कुश्ती में व्यस्त हैं.

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