pakistan Punjab Assembly Speaker Malik Ahmed Khan seen with Pahalgam attack terrorist Saifullah Kasuri

Pahalgam Terror Attack: पाकिस्तान की पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष मलिक अहमद खान लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी का सार्वजनिक रूप से बचाव करने के बाद जांच के घेरे में हैं. कसूरी 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड है. 

पत्रकार ताहा सिद्दीकी ने एक्स पर फोटो शेयर कर जानकारी देते हुए बताया कि पाकिस्तान के पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष, लश्कर कमांडर सैफुल्लाह अंसारी, तल्हा सईद और मंत्री मलिक रशीद अहमद खान को हाल ही में एक रैली में देखा गया. 

हाफिज सईद के बेटे और लश्कर चीफ के साथ दिखे मलिक अहमद 

एक रैली के दौरान मलिक अहमद खान ने कसूरी का बचाव किया. अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए जोर दिया कि उन्हें बिना जांच के आरोपी नहीं मानना चाहिए. इससे पहले 28 मई को मलिक अहमद खान को पंजाब के कसूर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सैफुल्लाह खालिद जिसे पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है और संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी हाफिज सईद के बेटे और लश्कर चीफ तल्हा सईद के साथ बैठे देखा गया था.

संयुक्त राष्ट्र ने खालिद और तल्हा दोनों को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर रखा है. खालिद को आधिकारिक तौर पर अमेरिका ने आतंकी घोषित कर रखा है. यौम-ए-तकबीर के अवसर पर पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) की तरफ से आयोजित रैली में खाद्य मंत्री मलिक रशीद अहमद खान, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पीएमएल-एन नेता मरियम नवाज के करीबी सहयोगियों सहित वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए.

एक्स पर शेयर किए गए वीडियो में मलिक अहमद खान ने कसूर जिस शहर में रैली हुई थी, वहां से अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया, जिससे विवाद और बढ़ गया. अमेरिका द्वारा नामित आतंकवादी सैफुल्लाह कसूरी और मुजम्मिल हाशमी ने पिछले सप्ताह आयोजित रैलियों में बांग्लादेश में तथाकथित तख्तापलट में अपनी संलिप्तता का भी जिक्र किया. 

आतंकी मुजम्मिल हाशमी ने पीएम मोदी को दी चेतावनी   

28 मई को गुजरांवाला में लश्कर-ए-तैयबा के राजनीतिक मोर्चे पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) की तरफ से आयोजित रैली में हाशमी ने पीएम मोदी को चेतावनी देते हुए कहा, “तुम हमें अपनी गोली से डराते हो, मोदी हम तुझे पैगाम देते हैं, हमारे बच्चे तेरी मिसाइलों से नहीं डरते तो हम तुम्हारी गोलियों से क्यों डरेंगे?” 

रहीम यार खान में एक अन्य रैली में कसूरी ने 1971 के बांग्लादेश युद्ध के साथ ऐतिहासिक समानताएं जोड़ते हुए दावा किया कि उनके संगठन ने पाकिस्तान की हार का बदला लिया था.

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