
शारदीय नवरात्रि का पर्व 9 दिन तक चलता है, वहीं दुर्गा पूजा का त्योहार 5 दिन तक मनाया जाता है. दुर्गा पूजा के दौरान माता अपनी संतान संग पृथ्वी पर मायके आती हैं.

दुर्गा पूजा इस साल 9 अक्टूबर 2024 को अश्विन शुक्ल षष्ठी तिथि से से शुरू हो रही है इसका समापन 12 अक्टूबर 2024 को विजयादशमी पर होगा.

दुर्गा पूजा 2024 का पूरा कैलेंडर यहां जानें.

दुर्गा पूजा के पहले दिन यानी षष्ठी तिथि को कल्पारंभ परंपरा निभाई जाती है. कल्पारंभ की पूजा पर देवी दुर्गा को बिल्व वृक्ष या कलश में निवास करने के लिए आमंत्रित किया जाता है.

कल्पारंभ को अकाल बोधन भी कहते हैं. अकाल बोधन का अर्थ होता है देवी दुर्गा का असामयिक आव्हान करना. अभी चूंकी देव सो रहे हैं, ऐसे में असमय देवी को नींद से जगाना अकाल बोधन कहा जाता है.

कल्पारंभ को अकाल बोधन भी कहते हैं. अकाल बोधन का अर्थ होता है देवी दुर्गा का असामयिक आव्हान करना. अभी चूंकी देव सो रहे हैं, ऐसे में असमय देवी को नींद से जगाना अकाल बोधन कहा जाता है.

दुर्गा पूजा के दौरान नवपत्रिका परंपरा में देवी दुर्गा को नौ पौधों के एक समूह में आमन्त्रित किया जाता है, नवपत्रिका को लाल या नारंगी रंग के वस्त्र से सुसज्जित कर, किसी नदी में औपचारिक रूप से स्नान कराया जाता है.

स्नान के पश्चात नवपत्रिका को देवी दुर्गा के चित्रपट के दायीं ओर एक लकड़ी की चौकी पर स्थापित किया जाता है. देवी दुर्गा के चित्रपट और मूर्ति का अभिषेक किया जाता है और उन्हें जागृत किया जाता है.
Published at : 02 Oct 2024 10:15 AM (IST)
ऐस्ट्रो फोटो गैलरी
ऐस्ट्रो वेब स्टोरीज
Read More at www.abplive.com